हिन्दुस्तान जिंक द्वारा भारतीय सांकेतिक भाषा सीखने हेतु सत्र आयोजित


अजमेंर, चित्तौडगढ़, जावर, आगूचा और देबारी के 1 हजार से अधिक बच्चों और कर्मचारियों ने लिया भाग

भीलवाड़ा। (पंकज पोरवाल) हिन्दुस्तान जिंक द्वारा नोएडा डेफ सोसाइटी के सहयोग से भारतीय सांकेतिक भाषा सीखने हेतु सत्र आयोजित किए गए। जिसका उद्देश्य बधिर और मूक लोगों के बारे में जागरूकता और उन्हें हिन्दुस्तान जिं़क की सीएसआर पहल जीवन तरंग के तहत समाज में एकीकृत करना था। भारतीय सांकेतिक भाषा अजमेंर, चित्तौडगढ़, जावर, आगूचा और देबारी में सत्र आयोजित किए गए जिसमें परियोजना लाभार्थियों और हिन्दुस्तान जिं़क के कर्मचारी सम्मिलित हुए। सत्रों में जिंक कौशल केंद्र के प्रशिक्षुओं, सखी परियोजना से जुड़ी महिलाओं, शिक्षा संबल परियोजना संचालित विद्यालयों के बच्चों और विद्या भवन के सहयोग से संचालित ऊंची उड़ान के विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों सहित 1034 लोगों ने इन सत्रों में रूचि से भाग लिया। संवादात्मक सत्रों में आईएसएल की बुनियादी वर्णमाला सीखना और आप कैसे हैं आपका दिन कैसा है, सुप्रभात-शुभ संध्या आदि जैसे बुनियादी वाक्यों के उपयोग से बातचीत करना शामिल था। आकर्षक सत्रों में सभी परियोजनाओं के लोग और कर्मचारी अपनी प्रतिक्रिया साझा करने और उससे सीखने के लिए आगे आए। यह पहल अवरोध को तोड़ने की दिशा में एक कदम है, ताकि हम अपने मूक-बधिर साथियों साथ संवाद को आसान बना सकें और अधिक समावेशी तथा सामंजस्यपूर्ण वातावरण की ओर बढ़ सकें।

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