57.8 प्रतिशत अधिकारी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से, 35 साल से कम उम्र के युवा संभाल रहे तकनीक और नवाचार की कमान
उदयपुर/भीलवाड़ा। (पंकज पोरवाल) मेटल और माइनिंग उद्योग अब सिर्फ मशीनों और खनन प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रहा। डिजिटल तकनीक, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच युवा इंजीनियर इस उद्योग के कामकाज और भविष्य दोनों को नई दिशा दे रहे हैं। इंजीनियर्स डे पर हिंदुस्तान जिंक ने अपनी युवा इंजीनियरिंग प्रतिभाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कंपनी में तकनीकी बदलाव और नवाचार की तस्वीर सामने रखी।
कंपनी के कुल 2,685 अधिकारियों में 1,551 यानी 57.8 प्रतिशत इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं। वहीं युवा प्रोफेशनल्स में 76 प्रतिशत कोर इंजीनियरिंग क्षेत्रों से जुड़े हैं। नेतृत्वकारी भूमिकाओं में करीब 10 प्रतिशत अधिकारी 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। कंपनी के 62 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी भी 35 वर्ष से कम आयु के हैं।
युवा इंजीनियर बदल रहे खदानों का चेहरा
हिंदुस्तान जिंक में युवा इंजीनियर आधुनिक तकनीकों के जरिए खनन और मेटल उत्पादन की कार्यप्रणाली को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रिमोट ब्लास्टिंग, टेली-रिमोट मशीन संचालन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, ऑटोमेटेड प्रक्रियाओं और डिजिटल कंट्रोल रूम जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से खनन कार्यों को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और कुशल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
इन तकनीकों के जरिए मशीनों को डिजिटल क्षमता से लैस किया जा रहा है। युवा इंजीनियर तकनीकी प्रक्रियाओं की निगरानी, संचालन और नवाचार के माध्यम से खनन क्षेत्र में नई संभावनाओं को आकार दे रहे हैं।
57.8 प्रतिशत अधिकारी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से
कंपनी के कुल 2,685 अधिकारियों में से 1,551 अधिकारी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं। यह कुल अधिकारियों का 57.8 प्रतिशत है। इसके अलावा युवा प्रोफेशनल्स में 76 प्रतिशत कोर इंजीनियरिंग क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं।
नेतृत्वकारी भूमिकाओं में करीब 10 प्रतिशत अधिकारी 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। वहीं कंपनी के 62 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी 35 वर्ष से कम आयु के हैं। इससे कंपनी के तकनीकी और परिचालन क्षेत्रों में युवा प्रतिभाओं की बड़ी भूमिका सामने आती है।
अमरेंदु प्रकाश ने युवा इंजीनियरों की भूमिका को बताया अहम
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ एवं पूर्णकालिक निदेशक अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि तेजी से बदलते उद्योग में युवा इंजीनियर नई सोच और तकनीकी क्षमता के साथ जटिल चुनौतियों के समाधान खोज रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी का प्रयास ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां जिज्ञासा और महत्वाकांक्षा नवाचार में बदल सके। तकनीकी बदलावों के दौर में युवा इंजीनियरों की सोच और क्षमता को उद्योग के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
335 कैंपस हायरिंग से जुड़ी नई तकनीकी प्रतिभाएं
हिंदुस्तान जिंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में 335 कैंपस हायरिंग के जरिए नई तकनीकी प्रतिभाओं को कंपनी से जोड़ा। इसके माध्यम से युवा इंजीनियरिंग प्रतिभाओं को कंपनी के तकनीकी और परिचालन कार्यों में अवसर मिला।
कंपनी में महिला अधिकारियों की हिस्सेदारी 20.5 प्रतिशत है, जबकि लैंगिक विविधता अनुपात 26.3 प्रतिशत है। इसके अलावा 423 से अधिक गैर-अधिकारी कर्मचारी भी इंजीनियरिंग गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
‘एम्प्लॉयी फर्स्ट’ नीति पर जोर
कंपनी की ‘एम्प्लॉयी फर्स्ट’ नीति कर्मचारियों को जीवन के हर चरण में समान अवसर और करियर विकास प्रदान करने पर केंद्रित है। महिलाओं को विभिन्न शिफ्टों और महत्वपूर्ण परिचालन भूमिकाओं में अवसर देने के साथ-साथ कई सुविधाएं और नीतियां लागू की गई हैं।
इनमें लचीले कार्य घंटे, स्पाउस हायरिंग, बच्चों की देखभाल के लिए एक वर्ष तक का अवकाश तथा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाली नीतियां शामिल हैं।
रुचि और क्षमता के अनुसार भूमिका बदलने का अवसर
कंपनी की ओर से कर्मचारियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार विभिन्न व्यवसायिक कार्यों में भूमिका बदलने के अवसर भी प्रदान किए जाते हैं। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को अपनी क्षमता के अनुरूप नए क्षेत्रों में काम करने और करियर विकास के अवसर उपलब्ध कराना है।
तकनीक, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच युवा इंजीनियरिंग प्रतिभाओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। हिंदुस्तान जिंक में भी युवा इंजीनियर आधुनिक तकनीकों के जरिए खनन और मेटल उत्पादन को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और कुशल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
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Bhilwara, Rajasthan
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