हिरण्यकश्यप क्रोध एवं लोभ का प्रतीक था – बालविजय शास्त्री


शिवाड़ 23 अगस्त। घुश्मेश्वर महादेव मंदिर कालरा भवन में आयोजित संगीत मय भागवत कथा में तीसरे दिन पण्डित बाल विजय शास्त्री ने कथा में हिरण्य कश्यप वध, द्रोपदी सती चरित्र पर प्रकाश डाला।
कथा में बाल विजय शास्त्री ने बताया कि वराह भगवान द्वारा हिरण्या वध ब्रह्मा के द्वारा सृष्टि भागवत के 10 लक्षणों का वर्णन किया हिरण्यकश्यप क्रोध का, लोभ का प्रतीक था। इस दौरान पंडित ने द्रौपदी सती चरित्र का वर्णन किया तथा कहा कि सत्संग जीवन का आधार होना चाहिए बिना सत्संग हम बच्चों को क्या संस्कार देगे। भागवत श्रवण से समस्त विकरों का नास होता है। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने नाच गाकर कथा का आनंद उठाया।
वहीं मंदिर ट्रस्ट पदाधिकारी प्रेम प्रकाश शर्मा लोकेंद्र सिंह बेनी माधव शर्मा जगदीश प्रसाद सोनी लल्लू लाल महावर राम राय चौधरी सत्यनारायण मिश्रा द्वारा कथा के यजमानों का माल साफा दुपट्टा पहना कर स्वागत किया। इस दौरान ट्रस्ट अध्यक्ष प्रेम प्रकाश शर्मा ने भागवत कथा सुनने के लिए अधिक से अधिक भक्त जनों को आने के लिए आवाहन किया


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