आईएमसीसी भीलवाड़ा जिला शाखा द्वारा गणगौर बिंदोरा का शानदार आयोजन सम्पन्न


हमारी संस्कृति – हमारी विरासत – गणगौर महोत्सव

गणगौर महोत्सव में सभी ने नृत्य व गीतों के साथ लिया भरपूर आनंद, गणगौर पर आधारित गेम्स खिले गए

भीलवाडा।हमारी सांस्कृतिक धरोहर ही हमारी विरासत है, इसी भावना के साथ अन्तर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भीलवाड़ा जिला शाखा के सदस्यों द्वारा गणगौर महोत्सव के अन्तर्गत राजस्थान के परम्परागत मुख्य त्यौहार गणगौर के बिंदोरे का आयोजन स्थानीय निजी रिसॉर्ट में क्लब के राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती अनिता जी डॉ अशोक जी सोडाणी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ मे जिलाध्यक्ष श्रीमती डॉ चेतना-सुनील जागेटिया ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम संयोजक श्रीमती सीमा-डीसी बिड़ला व श्रीमती डॉ संजीवनी-डॉ. शिवरतन सोमानी ने बताया कि सभी कपल पारंपरिक राजस्थानी परिधानों में सजधज कर आए। ईसरजी-गणगौर की सेवरा सहित सुंदर झांकी सजाई गई। सभी ने अपने पति के साथ अपने परिवार के लिए माँ गोरा और ईसरजी से आशीर्वाद माँग कर पूजा अर्चना की और गणगौर के गीत व उखाने गाए। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष श्रीमती डॉ चेतना-सुनील जागेटिया, महासचिव श्रीमती डॉ राखी-प्रमोद राठी, पूर्व जिलाध्यक्ष श्रीमती कांता-बीएल मेलाना, श्रीमती कुसुम-राकेश जागेटिया, जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट श्रीमती नीलम-प्रकाश दरगड, जिला संयुक्त सचिव श्रीमती खुशी-राकेश देवपुरा, जिला शिक्षा सचिव श्रीमती इंदिरा-डॉ. भागचंद सोमानी, जिला पर्यावरण सचिव एस्ट्रोलॉजर श्रीमती चेतना-पुरषोत्तम बसेर, जिला समाज सेवा सचिव श्रीमती सुनीता-मनीष पलोड, जिला कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती सविता-कमलेश डाड, कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती वंदना-मुकेश बल्दवा, श्रीमती मीनाक्षी-दरगड सभी ने गणगौर महोत्सव में नृत्य व गीतों के साथ भरपूर आनंद लिया। संयोजकों द्वारा गणगौर पर आधारित गेम्स खिलाए गए। कार्यक्रम के अन्त में सभी ने साथ स्नेहभोज किया। अंत मे सभी का आभार जिला सचिव श्रीमती डॉ राखी-प्रमोद राठी ने व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि पिछले 8 वर्षों से नियमित रूप से अन्तर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भारत सभी प्रदेश अध्यक्ष व पदाधिकारियों के नेतृत्व में क्लब की 131 जिला व नगर शाखाओं तथा विदेश की 7 शाखाओं द्वारा भारतीय संस्कृति के सभी परम्परागत त्यौहारों के प्रचार प्रसार पर ध्यान दिया जाता है ताकि समाज की युवा पीढ़ी को हमारी सांस्कृतिक धरोहर विरासत में सौपी जा सके।


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