बारा विधायक की मौजूदगी में गूंजा विजय दिवस, सेनानी वंशजों को नमन, कवियों ने बांधा समां


प्रयागराज। मंगलवार को विजय दिवस के पावन अवसर पर गौहनिया स्थित एम.वी. कॉन्वेंट स्कूल परिसर देशभक्ति, सम्मान और उत्साह के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मृति शेष राजाराम आर्य की पावन स्मृति को समर्पित भव्य होली मिलन समारोह, कवि सम्मेलन तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशजों का सम्मान समारोह बड़े ही गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, समाजसेवी और बुद्धिजीवी एक ही मंच पर एकत्रित हुए, जिससे पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से ओतप्रोत हो उठा। समारोह में मुख्य रूप से बारा विधायक डॉ. वाचस्पति तथा कौशाम्बी की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु वाचस्पति की उपस्थिति रही। दोनों अतिथियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित कर उनके त्याग, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन किया। कार्यक्रम का आयोजन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वंशज विचार समिति के संयोजक सूर्य प्रकाश समदरिया के नेतृत्व में किया गया, जिसमें सेनानी वंशजों का सम्मान पूरे सम्मान और गौरव के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी के वंशजों को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान के दौरान मंच से बार- बार देशभक्ति के नारे गूंजते रहे और उपस्थित लोगों ने खड़े होकर सेनानियों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। समारोह का विशेष आकर्षण कवि सम्मेलन रहा, जिसमें देश और समाज की भावनाओं को शब्द देने वाले चर्चित कवियों ने अपनी ओजपूर्ण, हास्य और देशभक्ति से भरी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि अशोक सिंह बेशरम, लालजी सिंह देहाती, संतोष शुक्ल समर्थ, धनंजय शाश्वत, नीलम तिवारी, मोहिनी श्रीवास्तव, सत्यभामा मिश्रा, सुरेश केसरवानी ‘ओम शांति’, प्रमोद बाबू झा, मुराद अहमद मुराद, निखिलेश मालवीय और ठाकुर इलाहाबादी सहित कई कवियों ने मंच से ऐसी प्रस्तुतियां दीं कि पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लगभग एक दर्जन से अधिक कवियों ने हास्य और व्यंग्य से भरी कविताओं से लोगों को हंसी से लोटपोट कर दिया, वहीं ओजपूर्ण रचनाओं ने युवाओं में देशभक्ति का जोश भर दिया। कार्यक्रम के अंत तक श्रोताओं की भीड़ मंच के सामने डटी रही और हर प्रस्तुति पर उत्साह के साथ तालियां बजती रहीं। पूरे आयोजन के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ मानो विजय दिवस केवल एक तिथि नहीं बल्कि बलिदान, सम्मान और राष्ट्रगौरव की जीवंत कहानी बनकर लोगों के सामने उतर आया हो। कार्यक्रम के अंत में विधायक डॉ वाचस्पति ने आए हुए सभी अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया।


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