सीएचसी शंकरगढ़ में नसबंदी कराने पर समय से नहीं मिल पा रही प्रोत्साहन राशि


4 महीने बीतने के बावजूद भी लाभार्थियों के खाते में नहीं पहुंची प्रोत्साहन राशि

प्रयागराज। ब्यूरो राजदेव द्विवेदी। जनपद के यमुनानगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ में नसबंदी कराने वाली महिलाओं को प्रोत्साहन राशि के लिए भटकना पड़ रहा है।चार माह पूरे होने के बाद भी प्रोत्साहन राशि उनके बैंक अकाउंट में नहीं पहुंची। इधर प्रबंधन का कहना है कि नसबंदी के बाद उनके बैंक खाते में ऑनलाइन राशि भेज दी जाती है। महिलाओं को 2000 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। एक तरफ तो सरकार नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रोग्राम चल रही है और प्रोत्साहित करने के लिए नकद राशि बांट रही है। वहीं दूसरी तरफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ में नसबंदी करवाने के बाद लोगों को जो प्रोत्साहन राशि 2000 रुपए दी जाती है वह भी समयानुसार उनके बैंक अकाउंट में नहीं पहुंच पा रही है। नसबंदी करवाने वाली लगभग दर्जनों महिलाएं इस प्रचंड गर्मी में कई-कई दिनों से सीएचसी शंकरगढ़ का चक्कर लगा रही हैं। वहीं महिलाओं ने जानकारी देते हुए बताया कि सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर अभिषेक सिंह से शिकायत करने पर उनके द्वारा संबंधित कर्मचारियों को लगातार हिदायत देने के बावजूद भी कर्मचारी अपने मनमानी पर उतारू हैं। जबकि प्रोत्साहन राशि देने के लिए एनएचएम से बजट जारी होता है। लेकिन राशि बांटने और उसका रिकॉर्ड बनाने में लापरवाही बरतने के कारण महिलाओं को प्रोत्साहन राशि के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है।

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7 दिन के भीतर प्रोत्साहन राशि देने का है प्रावधान
परिवार कल्याण कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए 3 साल पहले नसबंदी ऑपरेशन पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को बढ़ा दिया गया है। शासकीय संस्था में नसबंदी ऑपरेशन करवाने पर बढ़ोतरी हुई है। महिला हितग्राही को पहले 1400 रुपए देने का प्रावधान था जिसमें 2000 रुपए प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान जोड़ा गया है।
महिलाओं को लगाना पड़ रहा चक्कर
कई महिलाओं ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी व फरवरी माह में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ में नसबंदी ऑपरेशन कराया था कई बार अस्पताल प्रबंधन से बात की गई लेकिन आज तक उनके बैंक खाते में राशि जमा नहीं हुई। चार महीने से नसबंदी कराने के बाद प्रोत्साहन राशि के लिए अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ रहा है काउंटर से कोई सही जवाब नहीं मिल रहा है। काउंटर पर बैठे कर्मचारी सुविधा शुल्क की मांग करते हैं। अगर चढ़ावा चढ़ा दिया गया तो तत्काल प्रोत्साहन राशि बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है।सुविधा शुल्क नहीं देने पर हीला हवाली कर रास्ता बता दिया जाता है।जितना सहयोग राशि नहीं मिल रही है उससे ज्यादा तो इस बेरहम कड़कड़ाती धूप में गांठ से पैसा और समय दोनों खर्च हो चुका है।


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