भारत अनादि काल से ही संस्कृति और संस्कारों का संरक्षक रहा है – कुमावत
शाहपुरा|दुनिया के देशों को जब भी संस्कार की आवश्यकता पड़ी तो दुनिया के देशों ने भारत की ओर देखा। भारत जो अनादि काल से ही संस्कृति और संस्कारों का संरक्षक रहा है। संस्कृत भाषा के अनुपम ज्ञान के कारण भारत विश्व गुरु कहलाया। यह बात संस्कृत भारती शाहपुरा विकासखंड द्वारा शंभूपुरा में चल रहे बाल केंद्र के समापन अवसर पर बोलते हुए भीलवाड़ा विभाग संयोजक परमेश्वर प्रसाद कुमावत ने कही। कुमावत ने कहा है कि संस्कृत और संस्कृति भारत की विशेषता है। आज भी दुनिया के लोग संस्कृत पढ़ने के लिए भारत आते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक के षोडश संस्कार संस्कृत भाषा के मंत्रों से ही संपन्न होते हैं। कार्यक्रम के शुभारंभ पर शाहपुरा विकासखंड संयोजक लोकेश कुमार सेन ने अतिथि परिचय एवं स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कार भारती शाहपुरा के संगठन मंत्री कैलाश सिंह जाड़ावत ने की। जाड़ावत ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी प्राचीनतम भाषा है जो प्रत्येक भारतीय के दैनिक व्यवहार में रची बसी हुई है। बाल केंद्र पर प्रतिदिन 30 से अधिक विद्यार्थी संस्कृत सीखने आते थे। समापन समारोह में संस्कृत भारती कार्यकर्ता महावीर कुमावत, चंदन नायक उपस्थित रहे।
Moolchand Peshwani

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