भीलवाड़ा|सिंधी समाज के आराध्य भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव चेटीचंड महापर्व 2025 के अंतर्गत रविवार को आयोजन का आठवां और अंतिम दिवस नाथद्वारा सराय स्थित पूज्य हेमराज भगत झूलेलाल मंदिर में धार्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। भगत परिवार के सान्निध्य में सामूहिक जनेऊ संस्कार, नन्हें बच्चों के मुंडन संस्कार तथा कई अन्य धार्मिक व सामाजिक आयोजन होने हैं।
इससे पूर्व शनिवार को महापर्व के सातवें दिन मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पंडित नवीन शर्मा के सान्निध्य में महंत टेऊं राम और भगत परिवार द्वारा ध्वज पूजन संपन्न हुआ। आयोजन समिति के प्रवक्ता मूलचंद बहरवानी ने बताया कि इस अवसर पर सैकड़ों समाजजन उपस्थित रहे।
ध्वजा चढ़ाने की ऐतिहासिक रस्म
पूजन पश्चात सिंधी सेंट्रल पंचायत अध्यक्ष रमेश सभनानी के नेतृत्व में समाजजनों ने धर्मध्वजा को कंधे पर उठाकर मंदिर शिखर तक ले जाकर विधिपूर्वक स्थापित किया। ध्वज यात्रा के दौरान पुष्प वर्षा, ढोल-नगाड़ों की धुन और भक्ति नृत्य के साथ श्रद्धालु झूलेलाल भगवान की जय-जयकार करते हुए चले।
भोज और पल्लव के साथ भक्ति रस में सराबोर हुआ वातावरण
ध्वजा स्थापना के पश्चात मंदिर परिसर में हथ-प्रसादी और भव्य भोज का आयोजन हुआ, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम का समापन आरती और पल्लव के साथ हुआ, जिसमें समाज की समृद्धि और सौहार्द की कामना की गई।
अंतिम दिन के कार्यक्रमों की तैयारियां पूरी
रविवार को अंतिम दिन सामूहिक जनेऊ संस्कार और मुंडन संस्कार के साथ-साथ कई धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। भगत परिवार की अगुवाई में समाजजन बड़ी संख्या में इन आयोजनों में भाग लेंगे। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचने की अपील की है।
समाज के गणमान्यजन रहे उपस्थित
शनिवार के आयोजन में वीरूमल पुरसानी, नवीन सभनानी, हेमनदास भोजवानी, कमल वैश्नानी, कैलाश कृपलानी, सुरेश भोजवानी, कोमल चावला, नानक राम गुरनानी, भगवंती भगत, गोर्धन जेठानी, विनोद झुरानी, महेश खोतानी, दीपू सभनानी, दर्शन आसवानी, भगवान उतमचंदानी, विजय गुरनानी, गुलशनकुमार विधानी, हरीश सखरानी, मनोज भोजवानी, अशोक धीरवानी, लखन मूलचंदानी, विक्की लालवानी, राम खोतानी, किशोर सोनी, चंदी चंदनानी, सुरेश लोंगवानी, ओम गुलाबानी, मनीष सबदानी और आसनदास लिमानी सहित समाज के अनेक गणमान्यजन व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
समाज की एकता और संस्कृति की झलक
आठ दिवसीय इस महापर्व में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ समाज की सांस्कृतिक परंपराओं, एकता और आस्था की अनुपम झलक देखने को मिली। चेटीचंड महापर्व न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि इसने समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का भी कार्य किया।