सामाजिक कुरीतियों पर रोक के लिए महापंचायत में 9 सख्त नियम लागू, फिजूलखर्ची कम करने और सामाजिक अनुशासन पर दिया गया जोर
भीलवाड़ा। पंकज पोरवाल। जोगी समाज महापंचायत में सामाजिक कुरीतियों, फिजूलखर्ची और सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। जिले की माण्डल तहसील स्थित ग्राम पंचायत चांदरास में रविवार को आयोजित पांच गांवों की महापंचायत में समाज के पंचों, प्रबुद्ध नागरिकों और प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से नौ महत्वपूर्ण नियम लागू किए। इन नियमों के तहत मृत्युभोज में मिठाई बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध, रात्रिकालीन विवाह पर रोक, सगाई एवं विवाह के खर्चों में भारी कटौती सहित कई सामाजिक सुधार संबंधी फैसले लिए गए। समाज ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सामाजिक स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।
पांच गांवों के समाजजनों की रही बड़ी भागीदारी
ग्राम पंचायत चांदरास में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में लादूवास, चांदरास, जोगरास, कापड़िया और फतहपुरा गांवों के बड़ी संख्या में समाजजन, पंच एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता समाज के पांच पटेलों ने की। सभी ने समाज में बढ़ती फिजूलखर्ची और सामाजिक बुराइयों पर चिंता व्यक्त करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
घुमन्तु जिला सहसंयोजक भंवर नाथ ने बताया कि समाज में लंबे समय से बढ़ती अनावश्यक खर्च की प्रवृत्ति और कई सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से सभी समाजजनों की सहमति से इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया गया।
सगाई और विवाह में खर्च की नई सीमा तय
महापंचायत में लिए गए निर्णयों के अनुसार अब सगाई की रस्म में पहले होने वाले 20 से 25 हजार रुपये तक के खर्च को घटाकर अधिकतम 5 हजार रुपये निर्धारित किया गया है।
इसी प्रकार लड़के पक्ष की ओर से शादी व्यवहार एवं रीति-रिवाजों के नाम पर होने वाले लगभग 40 हजार रुपये के खर्च को घटाकर अब केवल 10 हजार रुपये तय किया गया है। वहीं पडला प्रथा के अंतर्गत होने वाले खर्च को भी सीमित करते हुए 5 हजार रुपये के स्थान पर अब 2 हजार रुपये निर्धारित किए गए हैं।
रिश्ता तोड़ने और महिला को भगाने पर भारी जुर्माना
महापंचायत में यह भी तय किया गया कि यदि कोई सगा-संबंधी रिश्ता तय होने के बाद बिना किसी उचित कारण के उसे तोड़ता है, तो पांच पटेलों की समझाइश और जांच के बाद दोषी पक्ष पर 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जिसकी राशि प्रार्थी को दी जाएगी।
इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति किसी विवाहित महिला को भगाकर ले जाता है और एक महीने के भीतर उसे उसके परिवार या पति को वापस सौंप देता है, तो उस पर 1 लाख 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि वह महिला को वापस नहीं सौंपता और अपने पास रखता है, तो 2 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा।
रात्रिकालीन विवाह और मृत्युभोज की परंपरा में बड़ा बदलाव
समाज ने अब रात्रिकालीन विवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। सभी मांगलिक कार्यक्रम एवं विवाह के फेरे दोपहर अथवा सूर्यास्त से पहले सम्पन्न किए जाएंगे तथा बारात को भी समय रहते अपने गंतव्य के लिए रवाना होना होगा।
इसके साथ ही मृत्युभोज में फिजूलखर्ची रोकने के लिए मिठाई बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार केवल दाल, पूरी और लपसी ही बनाई जा सकेगी।
शराब पीकर हुड़दंग करने वालों पर भी सख्ती
महापंचायत ने यह भी तय किया कि शादी-विवाह, मांगलिक अथवा आध्यात्मिक कार्यक्रमों में यदि कोई व्यक्ति शराब पीकर हुड़दंग करता है या कार्यक्रम में बाधा पहुंचाने का प्रयास करता है, तो उस पर 1,200 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही उसे समाज के सामने हाथ जोड़कर माफी भी मांगनी होगी।
पहले समाज, फिर पुलिस तक पहुंचेगा मामला
बैठक में यह नियम भी लागू किया गया कि समाज के भीतर किसी भी प्रकार का विवाद या लड़ाई-झगड़ा होने पर सबसे पहले समाज के पांच पटेलों को सूचना देना अनिवार्य होगा। यदि पंच स्तर पर समाधान नहीं निकलता है, तभी संबंधित पक्ष पुलिस के पास जा सकेगा।
उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई
बैठक में गोरधन नाथ, जिलाध्यक्ष घुमन्तु लादू नाथ, सेणु नाथ, रतन नाथ, श्रवण नाथ भोपाजी, मदन नाथ, मोहन नाथ, सुवानाथ, बापू नाथ, पूरण नाथ, भैरूनाथ, गजु नाथ सहित पांचों गांवों के अनेक पंच, समाजसेवी और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
समाज के पंचों ने स्पष्ट किया कि महापंचायत में पारित सभी नियम पूरे समाज पर समान रूप से लागू होंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध समाज स्तर पर कठोर कार्रवाई की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। जोगी समाज के इन निर्णयों को क्षेत्र में सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
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Bhilwara, Rajasthan
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