कोठारी ने विधानसभा में उठाया जैन श्रमणों के विहार धाम के लिए भूमि आवंटन का मुद्दा उठाया


जयपुर। विधायक अशोक कुमार कोठारी ने राजस्थान विधानसभा में जैन समुदाय के श्रमणों (साधु-साध्वियों) के लिए विहार धाम हेतु भूमि आवंटन का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। पर्ची के माध्यम से उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जैन श्रमण समुदाय की अनमोल धरोहर हैं और उनके विहार तथा चातुर्मास के लिए प्रदेश में उचित व्यवस्था होना आवश्यक है।

विधायक कोठारी ने कहा कि जैन श्रमणों (साधु- साध्वियाँ ) द्वारा वर्ष में लगभग आठ माह पैदल एक स्थान से दूसरे स्थान तक विहार करते हैं और वर्षाकाल के चार माह एक स्थान पर रहकर चातुर्मास के दौरान प्रवचन देते हैं। उनके पास न तो कोई आश्रम होता है और न ही वाहन,इसलिए विहार के दौरान उन्हें ठहरने के लिए उपयुक्त स्थानों की आवश्यकता होती है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अपने संकल्प पत्र में जैन संतों के चातुर्मास हेतु भूमि आवंटित करने की घोषणा की थी। इस संबंध में अल्पसंख्यक मामलात विभाग द्वारा विभिन्न आदेश भी जारी किए गए हैं, जिनमें जिला कलेक्टरों को जैन श्रमणों के विहार,ठहराव और प्रवचनों के लिए भूमि आवंटित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद राजस्व एवं स्वायत्त शासन विभाग के बीच समन्वय के अभाव तथा आदेशों में स्पष्टता नहीं होने के कारण दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राजस्थान में विहार धाम के लिए भूमि आवंटन नहीं हो पाया है l कोठारी ने कहा कि विहार धाम नहीं होने के कारण जैन साधु-साध्वियों को अत्यधिक दूरी तक पैदल विहार करना पड़ता है और कई बार इस दौरान दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आदेशों का सरलीकरण कर पूरे राजस्थान में जैन साधु-साध्वियों के विहार,ठहराव और प्रवचन के लिए विहार धाम हेतु शीघ्र भूमि उपलब्ध कराई जाए।


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