नन्ही पर्यावरण सेविका श्रेया कुमावत की “प्रकृति दर्शन” प्रदर्शनी को मिल रही सराहना


एडीएम प्रकाशचंद्र रेगर ने किया अवलोकन, प्रयासों को बताया प्रेरणादायी

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी। हरित भारत और प्लास्टिक मुक्त भारत के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में नन्ही पर्यावरण सेविका श्रेया कुमावत की पहल इन दिनों शाहपुरा में चर्चा का विषय बनी हुई है। “ग्रीन लिटिल बेबी” के नाम से प्रसिद्ध श्रेया कुमावत द्वारा आयोजित “प्रकृति दर्शन” पर्यावरण जागरूकता प्रदर्शनी लगातार लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है और समाज को प्रकृति संरक्षण का सशक्त संदेश दे रही है।
प्रदर्शनी को अब तक कई स्थानीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी, आमजन तथा स्कूली बच्चे देख चुके हैं। सभी ने नन्ही पर्यावरण सेविका के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। प्रदर्शनी में लगाए गए मॉडल और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयोग बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को प्रभावित कर रहे हैं।
प्रदर्शनी के सातवें दिन शाहपुरा के अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रकाशचंद्र रेगर ने भी प्रदर्शनी स्थल पर पहुंचकर इसका अवलोकन किया। उन्होंने श्रेया द्वारा तैयार किए गए विभिन्न मॉडलों, जैविक खाद निर्माण, सीड बॉल तैयार करने की प्रक्रिया, प्लास्टिक के पुनः उपयोग से तैयार नवाचारों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों की विस्तार से जानकारी ली।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर रेगर ने श्रेया कुमावत के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इतनी कम आयु में पर्यावरण संरक्षण के प्रति इस तरह का समर्पण वास्तव में प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि बच्चों में यदि बचपन से ही प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का भाव जागृत हो जाए तो आने वाली पीढ़ियां पर्यावरण संरक्षण के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकती हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि श्रेया कुमावत के कार्यों और प्रयासों पर एक डॉक्यूमेंट्री तैयार कर उसे व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जाए, ताकि न केवल राजस्थान बल्कि अन्य राज्यों के लोग भी इससे प्रेरणा लेकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ सकें।
इस अवसर पर उन्होंने श्रेया को आशीर्वाद देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखते हैं। “प्रकृति दर्शन” प्रदर्शनी इन दिनों क्षेत्र में पर्यावरण जागरूकता का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभाव, वृक्षारोपण की आवश्यकता, जैविक खाद के उपयोग और प्रकृति संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। यही कारण है कि यह पहल अब समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक प्रेरक अभियान बनती जा रही है।


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