ग्राम सभा पहाड़ी कला जांच हेतु पहुंचे डीपीओ के समक्ष चले लात घूंसे वादी समेत कई घायल
प्रयागराज।उच्च न्यायालय के रिट याचिका संख्या 5703/2023 के आदेश के तहत गुरुवार की लगभग 6:30 बजे शाम को जांच करने के लिए पहाड़ी कला जांच को पहुंचे डीपीओ एवं अन्य अधिकारियों कर्मचारियों के सामने दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे, लाठी-डंडे चले जिसमें वादी समेत कई घायल। शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार सिंह जिला उपाध्यक्ष किसान मोर्चा (एडवोकेट हाईकोर्ट इलाहबाद ) का आरोप है कि गुरुवार को डीपीओ के द्वारा ग्राम पंचायत पहाड़ी कला के मजरा बसदेवा में मनरेगा से बने पार्क की जांच की जा रही थी। इसी दौरान धर्मेन्द्र सिंह (प्रधान पति), पार्थ (प्रधानपुत्र) और उनके साथ अन्य लोगों ने गाली-गलौच शुरू कर दी और मारपीट करने लगे। इसी दौरान एक हमलावर ने लाठी से सिर पर प्रहार कर दिया, जिससे प्रवीण सिंह लहूलुहान होकर गिर पड़े। विवाद बढ़ता देख समीप खड़े प्रवीण सिंह के चाचा आत्माप्रसाद सिंह बीचबचाव के लिए दौड़े तो प्रधानपति सहित आधा दर्जन से अधिक हमलावरों ने उन पर भी हमला बोल दिया और जमकर मारपीट की। बहरहाल, विवाद के बीच जांच करने गए डीपीओ मौके से खिसक लिए। बाद में प्रवीण सिंह पटेल थाने पहुंचे और शंकरगढ़ थाने में तहरीर दी।
*प्रधान पति सहित चार अन्य लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज
थाना प्रभारी शंकरगढ़ मनोज कुमार सिंह के अनुसार धर्मेन्द्र सिंह, नारेन्द्र सिंह, पार्थ सिंह, बीरेंद्र सिंह, लालप्रताप सिंह आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर लिया गया है।
विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए की गई थी शिकायत
बता दें कि ब्लाक-शंकरगढ़ की ग्राम पंचायत पहाड़ी कला (देवलाल नगर) की वर्तमान प्रधान लक्ष्मी पटेल और ग्राम विकास अधिकारी के विरुद्ध जांच हेतु प्रवीण पटेल ने शपथपत्र के साथ जिलाधिकारी प्रयागराज को शिकायत किया था जिसके पाश्चात् जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेश कुमार सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया लेकिन लगभग 8 महीने हो गए जांच पेंडिग थी। इसके पश्चात शिकायत करता प्रवीण पटेल ने उच्च न्यायालय इला0 में याचिका दाखिल कर जल्द से जल्द भ्रष्टाचार के खिलाफ जाँच की मांग किया जिसके पश्चात् जिलाधिकारी प्रयागराज ने सख्त लहजे में एक सप्ताह के भीतर शिकायतकर्ता, ग्राम प्रधान और ग्रामीणों की मौजूदगी में स्थलीय निरीक्षण, बिंदुवार जाँच करने और फोटो ग्राफ सहित आख्या डीपीआरओ को सौपने का निर्देश दिया था। दूसरी तरफ निर्देश के पश्चात् जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेश सिंह ने स्थलीय सत्यापन के लिए जाँच हेतु 22 जून 2023 को ग्राम प्रधान, सचिव, सहायक पंचायत अधिकारी पंचायत को सभी अभिलेखों के साथ उपस्थित रहने का आदेश दिया था।
*आखिर कौन हैं ये प्रधान पति, प्रधान पुत्र व प्रधान ससुर
पंचायती चुनाव में आरक्षण के बाद महिलाओं को ग्राम प्रधान बनने का मौका तो मिला लेकिन अभी भी प्रधानी की बागडोर उनके प्रधान पति, प्रधान पुत्र और प्रधान ससुर ही चला रहे हैं। शंकरगढ़ ब्लाक के किसी गांव सभा में आप कहीं भी चले जाइए अगर महिला प्रधान है तो वह सिर्फ चिड़िया बैठाने के लिए नाम की प्रधान होती है। प्रधान का पूरा काम उसका पति, बेटा अथवा ससुर ही करता है। आरक्षण की वजह से नाम की बस महिला प्रधान होती हैं काम से कोई लेना-देना नहीं। ब्लॉक स्तर की मीटिंग में कोई महिला प्रधान नहीं आती यह बात ब्लॉक स्तर के सभी अधिकारी जानते हैं परन्तु इस विषय पर कभी कोई कार्यवाही नहीं होती। यहां तक की ब्लॉक के अधिकारी महिला ग्राम प्रधान को भी नहीं पहचान सकते वजह यह है कि महिला प्रधानों का सामना कभी ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से हुआ ही नहीं। आरक्षण के बाद पंचायत में महिला प्रधानों की संख्या तो बढ़ी है लेकिन उनकी सहभागिता अभी बहुत कम है जबकि इस विषय पर उच्च अधिकारियों को जिम्मेदारी पूर्वक ध्यान देने की आवश्यकता है।
R. D. Diwedi

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