40 दिन में 210 किलोमीटर की दंडवत परिक्रमा कर एमपी के तीन संत पहुचे कामां


आस्था और भक्ति से ही शक्ति प्राप्त होती है संत रामप्रीत दास महाराज

कामां- आस्था और भक्ति से ही शक्ति प्राप्त होती है इसी प्रण और उद्देश्य को लेकर तीन संत ब्रज चौरासी कोस की दंडवत परिक्रमा लगाते हुए बुधवार को कामां क्षैत्र ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भोजन थाली पहुंचे| ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग में चल रहे सहायता शिविरों में लोगों ने इन संतों का स्वागत और सम्मान का आशीर्वाद प्राप्त किया|
मिली जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के मुरैना स्थित सिद्ध बरेड़ा आश्रम के संत तुलसीदास महाराज, रामप्रीत दास महाराज, रामखिलाड़ी दास महाराज ने गत तीन जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 258 किलोमीटर लम्बी ब्रज चौरासी कोस की दंडवत परिक्रमा करने का प्रण लिया था इसी प्रण को लेकर वह अपने आश्रम से ही दंडवत परिक्रमा करते हुए ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा के लिए निकल पड़े करीब 40 दिन मे 210 किलोमीटर की दंडवत परिक्रमा पूरी करते हुए बुधवार को कामां क्षेत्र में ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध भोजन थाली स्थित श्रीकृष्ण गौशाला पहुंचे जहां गौशाला के व्यवस्थापक स्वामी गणेशानंद जी महाराज ने तीनों संतों का स्वागत सम्मान किया | ब्रज चौरासी कोस की दंडवत परिक्रमा कर रहे संतो ने बताया कि वह प्रतिदिन 4 से 5 किलोमीटर की दंडवत परिक्रमा पूरी करते हैं
संतो ने बताया कि श्री कृष्ण की भक्ति व आस्था के बलबूते पर ही वह इस परिक्रमा को पूरी कर रहे हैं| दंडवती परिक्रमा लगाने वाले संत रामप्रीत दास ने बताया कि ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग में राजस्थान सरकार द्वारा पैदल पदयात्रियों के लिए निर्मित कराए गए सॉफ्ट कॉरिडोर पर अतिक्रमण के चलते यह अवरुद्ध है यदि परिक्रमा से पूर्व सरकार द्वारा सॉफ्ट कोरिडोर पर हुए अतिक्रमण को हटा कर उसकी सफाई हो जाती और इस पर बालू रेत डलवा दी जाती तो हमें यात्रा करने में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता सॉफ्ट कॉरिडोर में अतिक्रमण होने व रास्ता नहीं होने की वजह से उन्हें अब पक्की सड़क पर ही दंडवती परिक्रमा करनी पड़ रही है जिससे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है |
उल्लेखनीय है कि ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा कुल 258 किलोमीटर की है जो राजस्थान यूपी व हरियाणा से होकर गुजरती है लेकिन यह तीनों संत मध्यप्रदेश के मुरैना स्थित अपने सिध्द बरेडा आश्रम से ही दंडवत परिक्रमा कर कामां पहुंचे हैं और ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा पूरी करने के बाद दंडवत परिक्रमा करते हुए ही मुरैना स्थित अपने आश्रम पहुंचेंगे| दंडवत परिक्रमा करने वाले संतों ने बताया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आस्था भक्ति के आधार पर कोई भी काम कठिन नहीं है यदि व्यक्ति अपना उद्देश्य निर्धारित कर लेता है तो एक दिन उसे पूरा कर ही लेता है |दंडवत परिक्रमा करने वाले संतों का चामड मंदिर पर कमेटी के अध्यक्ष राधाशरण शर्मा खेमराज मातूकी वालों सहित अन्य लोगों ने स्वागत सम्मान किया वहीं कलावटा गांव के समीप चल रहे भंडारा शिविर में बलदेव गुर्जर ,सोनू सैनी,पूर्व पार्षद प्रदीप गोयल सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने संतों का स्वागत सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया |


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