डीएसबी परिसर में आयोजित महोत्सव में कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा, इंटरनेट के दौर में भी पुस्तकों का महत्व बरकरार है
नैनीताल। मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों और युवाओं में पुस्तकों के प्रति घटती रुचि को देखते हुए नैनीताल स्थित डीएसबी परिसर में पुस्तक दान महोत्सव का आयोजन किया गया। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के सौजन्य से आयोजित इस महोत्सव में विद्यार्थियों को पुस्तकों के महत्व से अवगत कराने और उनमें नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठित लेखकों की पुस्तकें वितरित कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। महोत्सव में कुल 3000 पुस्तकें निःशुल्क वितरित की गईं।
इंटरनेट के दौर में भी पुस्तकों का महत्व बरकरार
कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि इंटरनेट के इस दौर में सूचनाओं की उपलब्धता तो बढ़ी है, लेकिन पुस्तकों का महत्व आज भी बरकरार है। इंटरनेट पर उपलब्ध प्रत्येक जानकारी की प्रमाणिकता सुनिश्चित नहीं होती, जबकि पुस्तकों को लेखन, संपादन और प्रूफ रीडिंग जैसी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद प्रकाशित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि पुस्तकों के माध्यम से प्राप्त ज्ञान अधिक व्यवस्थित, विश्वसनीय और संदर्भ आधारित होता है। मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बच्चों में पुस्तकें पढ़ने की प्रवृत्ति कम होना चिंता का विषय है। नई पीढ़ी को कम उम्र से ही पुस्तकों से जोड़ना और उनमें नियमित पढ़ने की आदत विकसित करना जरूरी है।
प्रोफेसर बिष्ट ने कहा कि पुस्तक दान महोत्सव इसी दिशा में एक सार्थक पहल है। इसके माध्यम से बच्चों तक अच्छी पुस्तकें पहुंचाकर अध्ययन के प्रति उनकी रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रमाणिक पुस्तकों का विशेष महत्व
कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सिविल सेवा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में प्रमाणिक पुस्तकों और मूल स्रोतों का विशेष महत्व है। विद्यार्थियों को अध्ययन करते समय पुस्तक के लेखक, स्रोत और संदर्भ पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री के भरोसे रहने के बजाय मानक पुस्तकों का नियमित अध्ययन करना आवश्यक है। पुस्तकों के माध्यम से विषयों की गहराई से समझ विकसित होती है और विद्यार्थियों को प्रमाणिक जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है।
इंटरनेट और पुस्तकें एक-दूसरे के पूरक माध्यम
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर नवीन चंद्र लोहानी ने कहा कि इंटरनेट और पुस्तकें एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्ति के पूरक माध्यम हैं। इंटरनेट जहां त्वरित जानकारी उपलब्ध कराता है, वहीं पुस्तकों के अध्ययन से किसी विषय की गहरी और क्रमबद्ध समझ विकसित होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ अपने नोट्स तैयार करने की आदत डालने की सलाह दी। साथ ही भविष्य में भी पुस्तक मेलों और पुस्तक दान जैसे आयोजनों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
अतिथियों का सम्मान और कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम में निदेशक प्रोफेसर संजय पंत ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का स्वागत किया। कुलसचिव रितेश साह ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन निदेशक एवं विजिटिंग प्रोफेसर डॉक्टर ललित तिवारी ने किया।
भारतीय परंपरा के अनुरूप पुस्तक दान के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहानी को प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। इस अवसर पर कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट और प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहानी को शॉल ओढ़ाकर तथा गणेश जी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया।
राष्ट्रगीत और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
पुस्तक दान महोत्सव का शुभारंभ राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और कुलगीत के साथ हुआ। इसके बाद ठाकुर देव सिंह बिष्ट की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया तथा मां सरस्वती की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान शोध निदेशक डॉक्टर मनोज कुमार आर्य और चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर हरीश बिष्ट ने कुलपति प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहानी और कुलसचिव को शोध कार्य से संबंधित मोथ एटलस तथा गोल्डन बर्डविंग के चित्र भेंट किए। छात्र महासंघ अध्यक्ष यतेंद्र पांडे ने दोनों कुलपतियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।
3000 पुस्तकों का निःशुल्क वितरण, बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
महोत्सव में बड़ी संख्या में प्राध्यापक, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को कुल 3000 पुस्तकें निःशुल्क वितरित की गईं। इस पहल को विद्यार्थियों में पठन-पाठन की रुचि बढ़ाने और उन्हें गुणवत्तापूर्ण साहित्य से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना गया।
कार्यक्रम में प्रोफेसर ज्योति जोशी, प्रोफेसर महेंद्र राणा, प्रोफेसर दीपक पालीवाल, प्रोफेसर अर्चना श्रीवास्तव, डॉक्टर सुषमा टम्टा, डॉक्टर नीलू, डॉक्टर मोहित रौतेला, डॉक्टर दीपक मेलकानी, डॉक्टर अनीता पांडे, प्रोफेसर आशीष तिवारी, डॉक्टर प्रभा पंत, डॉक्टर हेम जोशी, डॉक्टर अशोक उप्रेती, प्रोफेसर लज्जा भट्ट, प्रोफेसर रीना सिंह, प्रोफेसर रुवाली, डॉक्टर मुकेश सामंत, डॉक्टर मंडोली, डॉक्टर सीता देवली, डॉक्टर गगन होती, डॉक्टर अशोक कुमार, डॉक्टर रवि जोशी, डॉक्टर दीपा, डॉक्टर प्रदीप गोस्वामी, नंदा बल्लभ पालीवाल, देवेंद्र बिष्ट, रितेश, कुंदन, अजय, नवीन और लता नितवाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
पुस्तक दान महोत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि डिजिटल संसाधनों के साथ पुस्तकों का नियमित अध्ययन भी जरूरी है। ज्ञान को गहराई और विश्वसनीयता के साथ समझने के लिए पुस्तकों से जुड़ाव बनाए रखना आवश्यक है।
यह भी पढ़ें:

नैनीताल, उत्तराखंड
Aawaz Aapki News WhatsApp चैनल से जुड़ें:
सबसे तेज़ और ताज़ा खबरें सीधे अपने व्हाट्सएप पर पाएं।