राष्ट्रीय कवि चैपाल, दौसा ने किया अभिनंदन, काव्य संध्या में झलकी साहित्यिक रंगत


डॉ. कैलाश मण्डेला का भव्य सम्मान समारोह आयोजित

शाहपुरा। पेसवानी। शहर के प्रख्यात साहित्यकार, केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित डॉ. कैलाश मण्डेला का राष्ट्रीय कवि चैपाल, दौसा के तत्वावधान में भव्य सम्मान किया गया। इस अवसर पर दौसा में सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें साहित्य जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि चैपाल, दौसा के जिलाध्यक्ष कवि कृष्ण कुमार सैनी, उपाध्यक्ष डॉ. बृजमोहन मीना, महासचिव कवि कैलाश सुमा और मिमिक्री कलाकार अशोक खेड़ला सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने माला, दुपट्टा, सम्मान पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर डॉ. मण्डेला का अभिनंदन किया। इस दौरान जिलाध्यक्ष सैनी ने राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर से प्रकाशित अपनी पुस्तक नमन शहीदों को और महासचिव कैलाश सुमा ने अपनी पुस्तक करारी चोट भेंट की।

काव्य संध्या में गूंजे साहित्यिक स्वर

सम्मान समारोह के उपरांत आयोजित काव्य संध्या में डॉ. कैलाश मण्डेला सहित अन्य कवियों ने अपनी श्रेष्ठ रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. मण्डेला ने अपनी चर्चित पंक्तियाँ प्रस्तुत करते हुए कहा –

बनते नहीं हैं गीत कभी भी प्रयास से,
कहता है कोई और ही मेरे कयास से,
जुड़ते हैं तार श्वास के, गूंजता है नाद,
मदहोशियां को लिखता हूं होशो-हवास से।

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उनकी इस रचना को श्रोताओं ने खूब सराहा।

वहीं, कवि कृष्ण कुमार सैनी ने वीर रस की ओजस्वी कविता से माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया –

स्वर्णाक्षर से लिखेंगे इतिहास हमेशा वीरों का,
गाएगी गुणगान सदा ही ये दुनिया रणधीरों का,
दी हैं जान जिन्होंने अपने वतन की रक्षा की खातिर,
होगा सदा सम्मान वतन में ऐसे हीरों का।

उनकी कविता ने उपस्थित श्रोताओं में जोश भर दिया और सभागार तालियों से गूंज उठा।

हास्य-व्यंग्य और प्रेम रस की कविताओं ने मोहा मन

कार्यक्रम में मिमिक्री कलाकार अशोक खेड़ला ने हास्य-व्यंग्य का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने फिल्मी कलाकारों और विभिन्न जानवरों की आवाज निकालकर सबको हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया।

इसके बाद, डॉ. बृजमोहन मीना ने प्रेम से ओतप्रोत अपनी कविता प्रस्तुत की –

झूठे वादों से मन कितना बहलाओगे,
तुम मेरी जान हमें कितना तरसाओगे,
सच बताऊं कि बन ठन के तुम इस तरह,
किससे मिलने सनम रात तुम जाओगे?

वहीं, कवि कैलाश सुमा ने गहरे भावों से भरी अपनी कविता सुनाई –

बता दे सत्य की राहें वही तो ज्ञान है जग में,
मिले हर ओर मधुवानी वही सम्मान है जग में,
दया और सत्य के बल से हर जो दर्द दीनों का,
विपद में साथ जो देता वही इंसान है जग में।

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संस्था के प्रति जताया आभार

डॉ. कैलाश मण्डेला ने अपने सम्मान पर खुशी जताते हुए राष्ट्रीय कवि चैपाल, दौसा के सभी पदाधिकारियों एवं साहित्य प्रेमियों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से साहित्य और कविता को प्रोत्साहन मिलता है और नवोदित कवियों को एक मंच मिलता है।

कार्यक्रम में दौसा एवं आसपास के साहित्यकार, कवि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस भव्य साहित्यिक संध्या की सराहना की और इसे एक यादगार आयोजन बताया।


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