ईलाज में लापरवाही या सिस्टम की नाकामी?-सीएचसी उनियारा में डॉक्टर पर लापरवाही से मौत का आरोप


पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी तो कोर्ट पहुँचा परिवार-कानूनी कार्रवाई को लेकर परिवाद पेश

टोंक/उनियारा। जिले के उनियारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही से एक व्यक्ति जो पेशेवर पत्रकार था कि मौत का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर की लापरवाही, गलत आंकलन और समय पर रेफर नहीं करने के कारण उनके पिता की मौत हो गई। हैरानी की बात यह भी है कि जब पीड़ित परिवार ने इस मामले की रिपोर्ट उनियारा थाना में दर्ज करवानी चाही तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद मजबूर होकर परिवार को न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी।

सीने में दर्द के बाद अस्पताल ले गए

परिवादी दुर्गाधन मयंक पुत्र स्वर्गीय सत्यप्रकाश मंयक निवासी उनियारा ने न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद में बताया कि 17 जनवरी 2026 की सुबह करीब 5 बजे उनके पिता स्व. सत्यप्रकाश मयंक (पत्रकार) को सीने में तेज दर्द हुआ। परिजन उन्हें सुबह करीब 7 बजे उनियारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। कथित आरोप है कि वहां मौजूद चिकित्सक डॉ. लेखराज मीणा ने केवल एक इंजेक्शन लगाकर उन्हें वापस घर भेज दिया और ओपीडी खुलने पर दोबारा आने को कहा।

जांच के बाद भी गंभीरता नहीं दिखाई

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परिवार के आरोपों अनुसार बाद में फिर अस्पताल ले जाने पर डॉक्टर ने LFT, CBC, ECG और लिपिड प्रोफाइल जैसी जांचें लिखीं। जांच रिपोर्ट देखने के बाद भी डॉक्टर ने केवल गैस्ट्रिक समस्या बताई और ड्रिप चढ़ा दी। कुछ देर बाद मरीज की हालत बिगड़ने लगी, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने इसे भी गंभीरता से नहीं लिया और ड्रिप हटाकर उन्हें बाहर धूप में बैठा दिया।

अस्पताल से घर भेजा, रास्ते में बिगड़ी हालत

परिवार का आरोप है कि डॉक्टर लेखराज मीणा ने मरीज को ठीक बताते हुए घर भेज दिया। बाद में जब हालत ज्यादा बिगड़ी तो परिजन उन्हें ईलाज के लिए कोटा ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही वे बेहोश हो गए। इसके बाद परिजन उन्हें बूंदी जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

ईसीजी देखकर डॉक्टर भी हैरान

परिवाद के अनुसार बूंदी जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने ईसीजी देखकर बताया कि मरीज को पहले ही तीन बार हार्ट अटैक आ चुके थे और समय पर सही उपचार या रेफर किया जाता तो शायद जान बच सकती थी।

डॉक्टर पर गंभीर आरोप

परिवार ने आरोप लगाया है कि सीएचसी उनियारा में तैनात डॉक्टर लेखराज मीणा ने लापरवाही, जल्दबाजी और उपेक्षा के साथ इलाज किया, जिसके कारण उनके पिता की मौत हो गई।

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पुलिस पर भी उठे सवाल

पीड़ित परिवार का कहना है कि जब उन्होंने इस मामले में उनियारा थाना में रिपोर्ट दर्ज करवानी चाही तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से मना कर दिया और कोर्ट जाने की सलाह दी।

अब अदालत में परिवाद पेश कर न्याय की गुहार
आखिरकार पीड़ित ने अदालत में परिवाद पेश कर डॉक्टर लेखराज मीणा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और 198 के तहत कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं :—
* क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जान इतनी सस्ती हो गई है?
* गंभीर हालत के बावजूद मरीज को रेफर क्यों नहीं किया गया?
* पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इनकार क्यों किया?
* क्या स्वास्थ्य विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगा?
फिलहाल मामला न्यायालय में पहुंच चुका है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है।


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