शंकरगढ़ ब्लाक में कई वर्षों से अंगद की तरह पैर जमाए जमे पंचायत सचिव


जब कि 3 वर्ष बाद कार्य क्षेत्र बदलने के हैं शासनादेश

मगर अफसरों की कृपा से काट रहे मलाई हो रहे मालामाल

राजनीतिक रसूख का उठा रहे फायदा बता रहे सत्ताधारी नेताओं का करीबी

प्रयागराज। जनपद के यमुनानगर विकासखंड शंकरगढ़ क्षेत्र में पिछले कई सालों से कई पंचायत सचिव एक ही स्थान पर अफसरों की कृपा से अंगद की तरह पैर जमाए हुए जमे हुए हैं। आज भी पंचायत सचिवों पर अधिकारियों की कृपा बनी हुई है। शंकरगढ़ ब्लॉक में तीन पंचायत सचिव ऐसे हैं जिन्हें एक ही स्थान पर पांच से छः साल हो चुके हैं बावजूद इसके उन्हें दूसरे ब्लॉकों में स्थानांतरित नहीं किया गया है। स्थानांतरण नीति के तहत तीन साल तक एक ही स्थान, पटल या विकास खंड क्षेत्र में तैनात सभी पंचायत सचिवों को हटाया जाना था लेकिन यहां राजनीतिक रसूख और अधिकारियों की कृपा के चलते इस नीति का पालन नही किया गया। कुछ पंचायत सचिवों को हटाया भी गया लेकिन वह फिर से संबंधित ब्लॉक में पहुंच गए या फिर उन्होंने राजनीतिक पहुंच के चलते मनमाफिक ब्लॉक में ट्रांसफर करा लिया। इससे शंकरगढ़ ब्लॉक क्षेत्रों में हालात यह हो गए हैं कि ग्राम पंचायत निधि और प्रधानमंत्री आवास के मामलों में घोटाले सामने आने लगे हैं। इसके बावजूद स्थानांतरण नीति लागू नहीं की गई जबकि शंकरगढ़ ब्लॉक क्षेत्रों के प्रधान भी संबंधित सचिवों को हटाने की मांग कर चुके हैं।अगर इन सचिवों का स्थानांतरण हो तो शायद ग्राम पंचायतों के हालात में सुधार हो सके। मजे की बात तो यह है कि एक पंचायत सचिव नगर पंचायत शंकरगढ़ के निवासी होते हुए भी शंकरगढ़ ब्लाक में मौजूद हैं। सवाल उठता है कि रसूखदार होने से ऐसे में सचिव के द्वारा ग्राम पंचायत में कैसे विकास जन्म लेगा।
शंकरगढ़ के सचिव बने मिस्टर इंडिया, सालों से रुके हुए हैं विकास कार्य
शंकरगढ़ ब्लाक के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं। सरकार लाखों रुपए खर्च कर गरीबों के लिए योजनाएं लाती है।लेकिन योजनाएं कुछ गैर जिम्मेदार सचिवों के कारण फाइलों में दम तोड़ देती है। शंकरगढ़ विकास खंड के लालापुर,ओढगी,सेमरी , अंमिलिया,नौढिया, मदनपुर, पूरे बल्दू, जनवा, बिहरिया ग्राम पंचायतों में सचिव की अनुपस्थिति और अधिकारियों की मॉनिटरिंग की कमी ने विकास कार्यों को प्रभावित किया है।
अधिकारियों की लापरवाही ग्रामीण परेशान:
ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों का आरोप है कि गांवों में सचिव की नियुक्ति के बावजूद वर्षों से सचिव ने कार्यालय में कदम नहीं रखा है इससे ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत है कि सरकारी योजनाओं जैसी आवश्यक सुविधाओं से भी वे वंचित रह गए हैं।


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