भगवान शंकर त्याग, तपस्या, वात्सल्य एवं करुणा की मूर्ति है – पाराशर


कलश यात्रा के साथ शिव महापुराण कथा का हुआ शुभारंभ

डीग 29 अप्रैल|सोमबार को शहर के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर पर आयोजित हो रही शिव महापुराण कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। इस दौरान कलश यात्रा बैंड बाजों की धुन पर शहर के मुख्य बाजार,लोहा मंडी,नई सड़क ,राजकीय चिकित्सालय,गणेश मंदिर,हिन्दी पुस्तकालय होते हुए अपने गंतव्य स्थान पर पहुंची।
कलश यात्रा का शहरवासियों द्वारा जगह जगह पुष्प वर्षा एवं आरती कर स्वागत किया।
इस मौके पर कथा वाचक लक्ष्मण मंदिर के मंहत पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर ने शिव महापुराण कथा का महात्म बताते हुए कहा कि शिव पुराण’ का सम्बन्ध शैव मत से है। इस पुराण में प्रमुख रूप से शिव-भक्ति और शिव-महिमा का प्रचार-प्रसार किया गया है। प्रायः सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा करुणा की मूर्ति बताया गया है। कहा गया है कि शिव सहज ही प्रसन्न हो जाने वाले एवं मनोवांछित फल देने वाले हैं।
पाराशर ने कहा कि रामचरित मानस में तुलसीदास ने जिन्हें ‘अशिव वेषधारी’ और ‘नाना वाहन नाना भेष’ वाले गणों का अधिपति कहा है, शिव जन-सुलभ तथा आडम्बर विहीन वेष को ही धारण करने वाले हैं। वे ‘नीलकंठ’ कहलाते हैं। क्योंकि समुद्र मंथन के समय जब देवगण एवं असुरगण अद्भुत और बहुमूल्य रत्नों को हस्तगत करने के लिए व्याकुल थे, तब कालकूट विष के बाहर निकलने से सभी पीछे हट गए। उसे ग्रहण करने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। तब शिव ने ही उस महाविनाशक विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। तभी से शिव नीलकंठ कहलाए। क्योंकि विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया था।
इस अवसर पर कृष्णा बाबा,वैध नंद किशोर गंधी,गोपाल बीडी वाले, पूर्व पार्षद मोहन स्वरुप पाराशर,रमेश अरोड़ा,श्री मेडीकल वाले,दिनेश सर्राफ,सुन्दर सरपंच, राधेश्याम तमोलिया,हरेश बंसल,सतीश तमोलिया,हरचंद पहलवान,हरिओम पाराशर,राजू बर्फ वाले,दाऊ दयाल नसवारिया,पिन्टल गुरु, पूर्व पार्षद महेंद्र शर्मा गुड्डू, आचार्य गणेश दत्त पाराशर,सुगन फौजी,पिन्टा शर्मा,गीता तमोलिया,पुष्पा झालानी,अंजली गंधी,सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष भक्त उपस्थित थे।

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