शाहपुरा के परेश शर्मा की किताब ‘जंगलों में पदचिह्न’ ने बनाई अमेजन टॉप-10 में जगह


36 वर्षों की वन सेवा के अनुभवों पर आधारित पुस्तक को पर्यावरण एवं प्रकृति श्रेणी में अमेजन की शीर्ष 10 सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में स्थान मिला।

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी। शाहपुरा के परेश शर्मा ने अपनी 36 वर्षों की भारतीय वन सेवा के अनुभवों को पुस्तक ‘जंगलों में पदचिह्न—एक वन अधिकारी के संस्मरण’ के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाकर नई उपलब्धि हासिल की है। पुस्तक के लोकार्पण के कुछ ही समय बाद इसे ऑनलाइन मंच Amazon पर पर्यावरण एवं प्रकृति श्रेणी की शीर्ष 10 सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में स्थान मिला है। यह उपलब्धि शाहपुरा सहित पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।

शाहपुरा से शुरू हुआ प्रेरणादायक सफर

वर्तमान में हैदराबाद में निवासरत परेश कुमार शर्मा मूल रूप से शाहपुरा के निवासी हैं। उन्होंने भारतीय वन सेवा में 36 वर्षों तक जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करते हुए अनेक चुनौतियों का सामना किया। उन्हीं अनुभवों, संघर्षों और संस्मरणों को उन्होंने अपनी पुस्तक में संजोया है।

हैदराबाद में हुआ पुस्तक का लोकार्पण

24 जून को हैदराबाद में आयोजित एक सादगीपूर्ण एवं गरिमामय समारोह में पुस्तक का लोकार्पण किया गया। इसके बाद पुस्तक तेजी से वन सेवा अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। पाठकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के चलते पुस्तक ने अमेजन की बेस्ट सेलर सूची में भी अपनी जगह बना ली।

वन सेवा के संघर्षों का सजीव चित्रण

‘जंगलों में पदचिह्न—एक वन अधिकारी के संस्मरण’ केवल आत्मकथात्मक संस्मरण नहीं, बल्कि वन सेवा के दौरान आए वास्तविक अनुभवों का दस्तावेज है। पुस्तक में बचपन की यादों से लेकर प्रशासनिक सेवा के कठिन सफर तक के अनेक प्रसंग शामिल किए गए हैं।

इसके अलावा अवैध कटाई रोकने, वन संपदा की तस्करी पर अंकुश लगाने, अतिक्रमण हटाने तथा वन्यजीवों की सुरक्षा के दौरान सामने आई चुनौतियों और जोखिम भरे अभियानों का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। लेखक ने बताया है कि कई अवसरों पर परिस्थितियां बेहद कठिन रहीं, लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्य से कभी समझौता नहीं किया।

सरकारी तंत्र की वास्तविक चुनौतियों का उल्लेख

पुस्तक का एक प्रमुख पक्ष यह भी है कि इसमें सरकारी तंत्र की जमीनी हकीकत, प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता, फाइलों की चुनौतियां और एक ईमानदार अधिकारी पर पड़ने वाले विभिन्न दबावों का स्पष्ट और तथ्यात्मक वर्णन किया गया है। यही कारण है कि इसे पढ़ने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे प्रेरणादायक और मार्गदर्शक पुस्तक बताया है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने की सराहना

सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी प्रियदर्शी दास ने इस पुस्तक को निडरता और स्पष्टवादिता का दस्तावेज बताया है। वहीं श्रीपाद भालेराव ने इसे वन विभाग की कार्यप्रणाली को समझने के लिए महत्वपूर्ण पुस्तक बताया।

इसके अलावा वरिष्ठ प्रशासक बी. पी. आचार्य ने पुस्तक को सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं और पर्यावरण संरक्षण में रुचि रखने वालों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। वहीं सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी सी. मधुकर राज ने कहा कि यह पुस्तक इस बात का प्रमाण है कि राजस्थान के छोटे शहर शाहपुरा का एक साधारण युवक भी अपनी मेहनत, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के बल पर प्रशासनिक व्यवस्था में उल्लेखनीय पहचान बना सकता है।

शाहपुरा के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

परेश शर्मा की यह उपलब्धि शाहपुरा के लिए गौरव का विषय है। ऐसे समय में जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया की प्राथमिकता बना हुआ है, उन्होंने अपने अनुभवों को पुस्तक के रूप में समाज के सामने रखकर नई पीढ़ी को प्रेरित करने का प्रयास किया है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य बड़ा हो और संकल्प मजबूत हो तो छोटे शहर कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते, बल्कि वही व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान बन जाते हैं।

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