गांवों में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां, संभावित उम्मीदवारों ने शुरू की तैयारियां


लखनपुर की जनता करेगी समर्थन, हम करेंगे परिवर्तन – ध्रुव कुमार त्रिपाठी उर्फ छोट्टन

प्रयागराज।राजदेव द्विवेदी। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव 2026 के लिए अभी से ही सियासी बयार बहने लगी है।संभावित उम्मीदवार जातीय आरक्षण की संभावना को देखते हुए लोगों से मिलना-जुलना शुरू कर दिए हैं। गांव के चौराहों और चाय की दुकानों पर वर्तमान प्रधानों के कार्यकाल समाप्त होने और आगामी चुनाव को लेकर बहस छिड़ गई है।गांव में चौक-चौराहों से लेकर चौपाल तक प्रधानी चुनाव की चर्चा जोरों पर है। लोग अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में बातें कर रहे हैं और उनकी योग्यता पर चर्चा कर रहे हैं। युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे भी चर्चा में हैं।प्रधानी चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ रणनीति बनाने में जुट गए हैं। वे अपने गांव के विकास के लिए योजनाएं बना रहे हैं और लोगों से समर्थन मांग रहे हैं। कोई किसी को चुनाव में सबक सिखाने की बात कर रहे हैं तो कोई दोबारा लाने की वकालत कर रहे हैं। संभावित उम्मीदवार जहां मतदाताओं की नव्ज टटोलने में लगे हैं। जातीय समीकरण और आरक्षण के मुद्दे भी चुनावी चर्चाओं में प्रमुख हैं।उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव अप्रैल-मई 2026 में होने की संभावना है। गुरुवार को जब मीडिया टीम विकासखंड शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत लखनपुर में पहुंची तो युवा समाजसेवी ध्रुव कुमार त्रिपाठी उर्फ छोट्टन महराज से मुलाकात होती है। जब आगामी ग्राम प्रधान की चुनाव को लेकर नव्ज टटोला गया तो सर्वप्रथम उन्होंने मकर संक्रांति की लोगों को शुभकामना देते हुए कहा कि सामान्य सीट की आशा पर हम भी चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। ग्राम वासियों का प्रेम स्नेह के साथ भावी प्रधान बनने का अवसर मिला तो जो कार्य बीते कई पंचवर्षीय में नहीं हो सके उसे पूरा करने और लोगों के विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा।जातीय आरक्षण चुनावों में जातीय समीकरण एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। कई क्षेत्रों में पैसे और बाहुबल का इस्तेमाल किया जाता है जो गांव की सरकार चुनने में सबसे बड़ा बाधा है। क्योंकि धन और बाहुबल से कुछ लोग वोट जुटाने की जुगत करते हैं और मतदाता उनके धन और बल के आगे बहक जाते हैं क्योंकि वह वर्तमान देखते हैं भविष्य नहीं। यही वजह है कि कुछ मतदाताओं द्वारा गांव की सरकार का सही चुनाव नहीं करने से 5 वर्षों तक अपने किए पर पछताना पड़ता है। जो वक्त पर अपने बहुमूल्य एक वोट की कीमत नहीं समझते। जब मीडिया टीम ने सवाल किया कि चुनावी प्राथमिकता क्या होगी ? तो युवा समाजसेवी ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करना मेरी पहली प्राथमिकता में है। अगर गांव को विकसित करना है तो ऐसे में ग्रामीणों को ग्राम प्रधान का चुनाव करने से पहले उनकी योग्यता,कर्मठता, समाज सेवा जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह विधानसभा और लोकसभा का चुनाव भी नहीं है कि पार्टी के हवा में प्रत्याशी भी निकल गए। जमीनी स्तर पर जिसका काम दिखेगा उसी को दोबारा लोग चुनेगे वरना नए लोगों को तरजीह दी जाएगी। हाला कि गांव के चौक चौराहों व सार्वजनिक स्थलों पर जमा होने वाले लोगों के बीच भी बस पंचायत चुनाव की ही चर्चा है। जिसमें मतदाताओं को अपनी अपनी बात है कुछ पक्ष हैं कुछ विपक्ष भी हैं। बहरहाल जनता को भी अब समझ है वह इस बदलते हालात को समझ रही है। क्योंकि 5 सालों तक लोगों से दूर रहने वाले अब घर-घर दौड़ लगा रहे हैं किसी को नहीं सुनने वाले अब लोगों के समक्ष हाथ जोड़ रहे हैं।


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