नदबई|पारिस्थिति के संतुलन बनाए रखने में गौरैया की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करने के साथ संरक्षण प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग 50 से अधिक देशों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से गौरैया दिवस का आयोजन किया गया।
यह नेचर फॉर सोसायटी द्वारा 2010 में भारत में शुरू किया गया था तथा 2012 में गौरैया को दिल्ली का आधिकारिक राज्य पक्षी घोषित किया गया।
गौरैया कभी हमारे घरों, बगीचों और गलियों में अपनी शानदार चहचहाट वातावरण को खुशनुमा बना दिया करती थीं। हालांकि हाल के वर्षों में शहरी और ग्रामीण दोनों ही परिदृश्यों में इसकी आबादी में गिरावट आई है जो कि पर्यावरण क्षरण का एक महत्वपूर्ण संकेतक है जो मानव स्वास्थ्य और कल्याण के लिए जोखिमों को उजागर करती है एवं इनकी उपस्थिति दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में जैव विविधता संवर्धन करने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाती है।
हिंदी में गौरैया तमिल में कुरुवी और उर्दू में चिरिया कहते हैं।
गौरैया भले ही छोटी हो लेकिन पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में गौरैया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है जो प्राकृतिक कीट नियंत्रण के साथ साथ परागकण और बीज फ़ैलाव कर पौधों की वृद्धि में सहायता करती है।
“बहुत कम हो रही इनकी प्रजाति,
इन्हें बचाना होगा।
प्यारी नन्हीं सी गौरैया को पुनः,फ़ुदक फुदक कर अंगना में लाना होगा।”
“आई लव स्पैरो, वी लव स्पैरो “।