भागीरथी प्रयास से अवतरित हुईं गंगा गंगा को गंदगी से बचाएंगे तभी अमृत जल पाएंगे
प्रयागराज। पौराणिक मान्यता के अनुसार गंगा दशहरा जेष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है जिसे हम गंगा दशहरा कहते हैं। इस दिन इक्ष्वाकु वंश के राजा भागीरथ के तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी के कमंडल से गंगा जी का मृत्युलोक पर अवतरण हुआ। गंगा भारतीयों के लिए महज एक नदी नहीं बल्कि मां समान है। हमारे ऋषि-मुनियों ने नदियों तीर्थों को देवत्व का दर्जा इसलिए प्रदान किया कि उनकी हर तरह से सुरक्षा संरक्षण की हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। जगत के यह पवित्र स्थान हमारे सभ्यता संस्कृति के उद्भव विकास का प्रेरणास्रोत बने। आज भी सनातन धर्म में प्रत्येक हिंदू परिवार के जन्म से लेकर मृतक के संस्कार गंगा तट पर संपन्न होते हैं ,गंगा नदी को प्रदूषण से बचाना हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है। उक्त बातें प्रयागराज के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेंद्र कुमार तिवारी दुकान जी ने कही। गंगा दशहरा महोत्सव के पावन पर्व पर गंगा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए दुकान जी गंगा स्वच्छता परिधान पहनकर लोगों से अपील करते हुए कि माला ,फूल ,हवन सामग्री गंगा नदी में ना डालें, संगम क्षेत्र को साफ स्वच्छ बनाए रखें , गंगा स्नान में साबुन का प्रयोग ना करें, कपड़े ना धोए ना निचोड़ें, गंगा की धार ही हमारे जीवन की आधार है, कूड़ा करकट कूड़ेदान में डालें, प्रतिबंधित पॉलिथीन पर्यावरण के लिए नासूर है इसका प्रयोग कदापि ना करें, पर्यावरण को बचाए रखने के लिए एक वृक्ष जरूर लगाएं, गंगा क्षेत्र में दर्शनार्थ हेतु आए हुए दर्शनार्थी संकल्प लें की गंगा को बचाएंगे तभी अमृत जल पाएंगे।
राजदेव द्विवेदी

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