प्रयागराज: 17 बीघे के सार्वजनिक तालाब पर दबंगों का कब्जा, बेदखली के आदेश के बाद भी प्रशासन मौन

हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों की उड़ रही धज्जियां; अमिलिया तरहार गांव में जल संकट गहराया, ग्रामीणों ने दी अवमानना याचिका की चेतावनी

प्रयागराज। एक ओर सरकार और उच्च न्यायालय जल संरक्षण को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं, वहीं प्रयागराज के बारा तहसील अंतर्गत ग्राम सभा अमिलिया तरहार में प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ लगभग 17 बीघे में फैले विशालकाय सार्वजनिक तालाब (गाटा संख्या 299 व 307) पर दबंगों ने अवैध कब्जा जमा रखा है, जिससे पूरा गांव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है।

कागजों में बेदखली, जमीन पर कब्जा बरकरार

राजस्व अभिलेखों में यह भूमि ‘तालाब’ के रूप में दर्ज है। आश्चर्य की बात यह है कि तहसीलदार बारा द्वारा सत्र 2020-21 में ही धारा 67 के तहत अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध बेदखली का आदेश पारित किया जा चुका है। मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है (PIL संख्या 2033/2025), जहाँ कोर्ट ने तालाबों को उनके मूल स्वरूप में लौटाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

प्रशासन के ‘ढुलमुल’ रवैये से बुलंद हैं दबंगों के हौसले

स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली तब सवालों के घेरे में आ गई जब उपजिलाधिकारी (SDM) बारा ने स्वयं 24 अप्रैल 2026 को पुलिस बल और राजस्व टीम गठित कर अतिक्रमण हटाने का लिखित आदेश दिया। लेकिन विडंबना यह है कि तय तिथि बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी आदेश केवल फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं।

पर्यावरण और पशुओं पर संकट

तालाब पर कब्जे के कारण गांव का पारिस्थितिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है। भू-जल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है और मवेशियों के लिए पीने के पानी का अकाल पड़ गया है। यह सीधे तौर पर अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार) का उल्लंघन है।

ग्रामीणों ने दी ‘कोर्ट की अवमानना’ की चेतावनी

प्रशासनिक उदासीनता से क्षुब्ध ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल तालाब को कब्जा मुक्त नहीं कराया गया, तो वे जिला प्रशासन के खिलाफ उच्च न्यायालय में ‘अवमानना याचिका’ दाखिल करेंगे।

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