सिस्टम से सवाल जिम्मेदार कौन?
प्रयागराज। गौ संरक्षण के लिए बनाई गई गौशाला में चारा पानी देखरेख इलाज के अभाव में पशुओं के मरने का सिलसिला लगातार जारी है यह बात को दबी जुबान से अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं लेकिन बार-बार शिकायत के बाद भी जांच के दौरान पशुओं के मरने के आंकड़ों पर पर्दा डालने का भरसक प्रयास हो रहा है शासन सत्ता से भी आने वाले लोगों को पशुओं के मरने का आंकड़ा नहीं दिखाई पड़ रहा है। जांच करने वाले दिन के पूर्व कितने पशुओं की मौत हो चुकी है इस पर जांच नहीं होती है, रजिस्टर पर जांच टिप्पणी नहीं लिखी जाती है,जांच के दिन के पूर्व कितने पशुओं की मौत हो गई है इस पर चर्चा करने से अधिकारी परहेज करते हैं, गौशाला में कितने पशु पहले थे किस दिन कितने पशु फिर से गौशाला में भेजे गए और गौशाला में किस दिन कितने पशुओं की मौत हुई, किस पशु को किस तारीख को किस नम्बर का टैग लगाया गया है वह नंबर रजिस्टर के किस सीरियल नंबर पर दर्ज है, गोवंश के मौजूदगी और मरने का पूरा विवरण गौशाला के रजिस्टर में मौजूद नहीं मिलते। पशुओं के कान में टैग लगाए जाते हैं पशुओं के मरने के बाद कान काटे पशुओं के शव लगातार मिलते हैं लेकिन गौशाला के पशु की मौत को मानने से अधिकारी इंकार कर देते हैं।आए दिन पशुओं के मरने की चर्चाएं अखबार की सुर्खियां बनती हैं ,कान कटे पशुओं की लाश देखी जाती है गौ संरक्षण केंद्र के अंदर से लेकर बाहर के क्षेत्रों में मरे हुए पशु आए दिन दिखाई पड़ते हैं, जिनका गौ संरक्षण केंद्र के अभिलेखों में लिखा पढ़ी नहीं होती है। आखिर पारदर्शी तरीके से शासन के निर्देश पर गो संरक्षण केंद्र में आंकड़ो के रजिस्टर क्यों नहीं बनाए जाते हैं, अगर रजिस्टर बने भी हैं तो सिर्फ कागज पर कुछ और जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती हैं।गौ संरक्षण केंद्र की देखरेख करने वाले रजिस्टर में विस्तार से लिखा पढ़ी क्यो नही करते हैं, इन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है कि आधे अधूरे लिखा पढ़ी कर पशुओं की मौत के आंकड़ा पर पर्दा डालकर अव्यवस्थित गोसंरक्षण केंद्र का संचालन करने के बाद भी संरक्षण के जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई करने के बजाए दोषियों के बचाव में अधिकारी ऊर्जा लगा रहे हैं, जिससे पशुओं के मरने का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं हो रहा है।करोड़ों रुपए महीने गो संरक्षण केंद्र में सरकार खर्च कर रही है लेकिन उसके बाद पशुओं की लगातार मौत होना बड़ी चिंता का विषय है लेकिन योगी सरकार को गुमराह कर अधिकारी गौ संरक्षण केंद्र के भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। अगर ऐसे मामलों में शासन ने सूक्ष्म जांच कराई तो शंकरगढ़ क्षेत्र के कई गो संरक्षण केंद्रों मेंअधिकारियों पर गाज गिरना तय है। ते आए दिन गोवंशों की मौत होने के बाद भी गंभीर नहीं हो रहे अधिकारी।
R. D. Diwedi

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