अखिल भारतीय गुर्जर महासभा द्वारा पन्नाधाय जी की जन्मजयंती पर कार्यक्रम आयोजित


गुर्जर समाज का इतिहास शौर्य और बलिदान की गाथाओं से भरा है: कालू लाल गुर्जर

कालू लाल गुर्जर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त, समाजजनों ने दी शुभकामनाए, जिलाध्यक्षों ने माला पहनाकर किया अभिनंदन

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के बैनर तले पन्नाधायजी की जन्मजयंती के अवसर पर गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज के लोगों ने मेवाड़ साम्राज्य के लिए पन्नाधाय के अभूतपूर्व त्याग, बलिदान और कर्तव्यपरायणता को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके राष्ट्र प्रेम के आदर्शों का गुणगान किया। कार्यक्रम में महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश भाटी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कालू लाल गुर्जर ने की। इस अवसर पर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा द्वारा कालू लाल गुर्जर को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया गया। इस घोषणा पर उपस्थित समाजजनों ने उनका स्वागत करते हुए शुभकामनाएँ दीं तथा सभी जिलाध्यक्षों ने माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम में राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष पुरुषोत्तम फागणा, राजस्थान कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल वर्मा, समाजसेवी देवकीनंदन ‘काका’, राजसमंद विधायक श्रीमती दीप्ति किरण माहेश्वरी, मालासेरी डूंगरी भगवान देवनारायण मंदिर के मुख्य पुजारी हेमराज गुर्जर सहित भीलवाड़ा जिला अध्यक्ष शंकरलाल गुर्जर, चित्तौड़ जिला अध्यक्ष मांगीलाल गुर्जर, प्रतापगढ़ जिला अध्यक्ष मनोहर गुर्जर, झालावाड़ जिला अध्यक्ष सूरत राम गुर्जर, राजसमंद जिला अध्यक्ष मांगीलाल गुर्जर के साथ ही महासभा के सभी जिलाध्यक्ष, समाजजन एवं कार्यकर्ताओं की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कालू लाल गुर्जर ने माता पन्नाधाय जी के अद्वितीय त्याग, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को स्मरण करते हुए समाज को उनके आदर्शों पर चलने का संदेश दिया। गुर्जर ने कहा कि पन्नाधाय का त्याग और बलिदान दुनिया की अनूठी मिसाल है, जहां राष्ट्र धर्म के लिए एक मां ने अपने छोटे से बच्चे का भी बलिदान दे दिया। कहा कि गुर्जर समाज का इतिहास शौर्य और बलिदान की गाथाओं से भरा है, इसमें पन्नाधाय के त्याग और कर्तव्यपरायणता का उदाहरण अद्वितीय है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक एकता के महत्व पर भी अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही केंद्र एवं राजस्थान सरकार से मांग की कि पन्नाधाय के जीवन और उनके बलिदान को शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी वक्ताओं ने माता पन्नाधाय के त्याग और बलिदान को प्रेरणादायी बताते हुए समाज को उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन समाज के विकास और एकता के संकल्प के साथ हुआ।


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