डीजीएमएस की कार्यशाला में माइन वाइंडर सिस्टम की सुरक्षा, एआई-आईओटी, डिजिटल मॉनिटरिंग और तकनीकी नवाचार पर विशेषज्ञों ने चर्चा की
भीलवाड़ा। भूमिगत खदानों में माइन शाफ्ट वाइंडर सिस्टम की सुरक्षा, विश्वसनीयता और तकनीकी उन्नयन को लेकर हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की रामपुरा आगुचा खदान में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। महानिदेशालय खान सुरक्षा (डीजीएमएस) के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में 100 से अधिक खनन विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला में डीजीएमएस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ खनन विशेषज्ञ, तकनीकी पेशेवर, उपकरण निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधि और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चा का केंद्र भूमिगत खदानों में इस्तेमाल होने वाले वाइंडर सिस्टम को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने, डिजिटल तकनीकों के उपयोग तथा नियामकीय मानकों के प्रभावी अनुपालन पर रहा।
माइन वाइंडर की सुरक्षा पर जोर
मुख्य अतिथि डीजीएमएस के उप महानिदेशक, नॉर्थ वेस्टर्न जोन मुरलीधर बिदारी ने कहा कि माइन वाइंडर की सुरक्षा के लिए नियमों का पालन, मजबूत इंजीनियरिंग, आधुनिक सुरक्षा प्रणालियां और निरंतर सीखने की संस्कृति जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं नियामकों, खदान संचालकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर सुरक्षा मानकों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विभिन्न संस्थाओं और कंपनियों के विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए और आधुनिक तकनीकों के जरिए खदान सुरक्षा को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।
एआई और आईओटी आधारित तकनीक पर प्रस्तुतियां
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने आईओटी आधारित सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम, वाइंडर सिमुलेटर, डिजिटल मॉनिटरिंग, ब्रेक सिस्टम डिजाइन और इवेंट रिकॉर्डिंग सिस्टम सहित विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर प्रस्तुतियां दीं।
इसके अलावा प्रिवेंटिव एवं प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और रिमोट मॉनिटरिंग के जरिए संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। अगली पीढ़ी के सुरक्षा समाधानों और तकनीकी उन्नयन को लेकर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
दुर्घटना जोखिम कम करने के उपायों पर चर्चा
कार्यशाला में वैश्विक स्तर पर हुई माइन वाइंडर घटनाओं से मिले सबक पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने भविष्य में दुर्घटना के जोखिम को कम करने के लिए तकनीकी और सुरक्षा प्रणालियों को और मजबूत करने के उपायों पर मंथन किया।
कार्यशाला के दौरान नियामकीय मानकों के प्रभावी पालन के साथ खदान संचालन में विश्वसनीयता और सुरक्षा के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया।
डीजीएमएस और हिंदुस्तान जिंक के अधिकारी रहे मौजूद
कार्यशाला में डीजीएमएस के वरिष्ठ अधिकारी टी. श्रीनिवास, प्रकाश कुमार, श्याम सुंदर सोनी, उमेश कुमार राव, विनोद राजक, के. रविंदर और रूपेश कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे।
हिंदुस्तान जिंक के सीओओ किशोर एस., रामपुरा आगुचा के आईबीयू सीईओ राम मुरारी सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञों ने भी सहभागिता की।
इसके अलावा हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, एबीबी, सिमेंस और सीआईटीआईसी के प्रतिनिधियों ने भी तकनीकी अनुभव साझा किए।
सुरक्षा और नवाचार के लिए साझा मंच
कार्यक्रम के अंत में रामपुरा आगुचा के यूनिट हेड वेकेश चित्तौड़ा ने आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला के माध्यम से नियामक संस्थाओं, खनन कंपनियों और तकनीकी साझेदारों के बीच सुरक्षा, तकनीक और नवाचार से जुड़े अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए साझा मंच मिला। भूमिगत खदानों में माइन वाइंडर सिस्टम की सुरक्षा और विश्वसनीय संचालन को लेकर विशेषज्ञों के बीच तकनीकी चर्चा हुई।
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Bhilwara, Rajasthan
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