सवाई माधोपुर 10 सितम्बर। आरक्षण उप वर्गीकरण संघर्ष समिति स.मा. की ओर से मंगलवार 10 सितम्बर को सर्वाेच्च न्यायालय के सात न्यायधीशों की संवैधानिक पीठ द्वारा अनुसूचित जातियों के उप वर्गीगण के फैसले के समर्थन में धन्यवाद रैली निकालकर विभिन्न मांगों के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में बताया गया है कि राजस्थान में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से कमजोर वाल्मीकि/मेहत्तर सांसी, कंजर, नट, ढोली, बाजीगर, सपेरा, मदारी, कालबेलिया, भांड, धानक, कामड़ आदि वंचित पिछडी हुई जातियां है जिनके साथ अधिकतर छुआछुत जातीय उत्पीडन मारपीट, हत्या, बलात्कार आदि घटनाएं होती रहती है। ये जातियां आजादी के 77 वर्षों बाद भी मुख्यधारा में नहीं आ पाई हैं। अनुसूचित जाति वर्ग में कई उप जातियां है जिनका जीवन यापन पद्धति अलग-अलग है और उनमें आपस में कोई सामाजिक या सांस्कृतिक सम्बंध भी नहीं है। इसलिए उन्हें समरूप नहीं कहा जा सकता है।
ज्ञापन में बताया गया कि संविधान के अनुच्छेद 16 (4) व अनुच्छेद 46 राज्य सरकार को इन जातियों के पिछडेपन का उन्मूलन करके के लिए विशेष शक्तियां प्रदान करता है। जिसका उपयोग कर राज्य सरकार यह पुनीत कार्य कर सकती है। जैसे पंजाब, हरियाणा, राज्यों की तरह प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उप वर्गीकरण हेतु लोक अधिसूचना जारी करने की मांग की।
उन्होने ज्ञापन में मांग की है कि एक माह के भीतर सर्वे करवाकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार अनुसूचित जाति एवं डी.एस.सी. दो वर्ग बनाकर अनुसूचित जाति के कोर्ट में जातियों का वर्गीकरण करवाएं ताकि वंचितों को लाभ मिल सके।
इस मौके पर तूफान सिंह पवार (पार्षद), किशन गोयर, बुद्धि प्रकाश कलोसिया, खेमराज कलोसिया, जगदीश संगत, संजय चंडालिया, भागचंद धाप, डॉ०आर एस नरवाल, भैरुलाल कलोसिया, ओम डंगोरिया, सुरजमल बुर्ट, पप्पू पटूना, शिक्षाविद आसाराम सरसिया, राजू संगत, ओम वाल्मीकि, राहुल कलोसिया, डा०गुलाब बारवासिया, गोविद डंगोरिया, घनश्याम, रामजीलाल डंगोरिया, अशोक कुमार, सोनू चण्डालिया, ताराचंद संगत सहित अनक लोग उपस्थित रहे।

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