सड़क बनी नहीं और मरम्मत का एस्टीमेट तैयार, जनता ने उठाए सवाल


गुणवत्तायुक्त सड़क निर्माण के साथ पांच साल के रखरखाव का एस्टीमेट सामने आने पर उठे सवाल, गुणवत्ता और सरकारी खर्च को लेकर जवाब मांग रही जनता

प्रयागराज। चुनाव नजदीक आने के बीच क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर लोगों के बीच सवाल उठने लगे हैं। एक सड़क के गुणवत्तायुक्त निर्माण के प्रस्ताव के साथ ही पांच साल के रखरखाव का एस्टीमेट तैयार किए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है।

लोगों का सीधा सवाल है कि यदि नई सड़क का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता और मानकों के अनुसार किया जाना है और उसके लंबे समय तक टिकने की बात कही जा रही है, तो निर्माण के साथ ही उसके रखरखाव का एस्टीमेट तैयार करने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

गुणवत्तायुक्त सड़क के साथ मेंटेनेंस एस्टीमेट पर सवाल

नई सड़क के निर्माण से जुड़े प्रस्तावों में गुणवत्तायुक्त सड़क निर्माण, निर्धारित मोटाई और निर्माण सामग्री जैसे मानकों का उल्लेख किया जाता है। वहीं, संबंधित कार्य के साथ कई वर्षों के रखरखाव का प्रावधान भी होने की बात कही जा रही है।

यहीं से जनता का सवाल शुरू होता है कि यदि सड़क मजबूत और टिकाऊ बननी है तो निर्माण के तुरंत बाद उसके रखरखाव की आवश्यकता क्यों मानी जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गुणवत्तायुक्त निर्माण और रखरखाव की जरूरत, दोनों को लेकर विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि सरकारी धन के उपयोग को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।

क्या सड़क की गुणवत्ता की होगी निगरानी

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली गिट्टी, सामग्री, मोटाई और निर्माण तकनीक की गुणवत्ता की प्रभावी निगरानी जरूरी है। उनका सवाल है कि यदि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए तो कुछ ही समय बाद मरम्मत की जरूरत क्यों पड़े।

लोगों ने मांग की है कि सड़क निर्माण से पहले और निर्माण के दौरान गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्य की नियमित निगरानी की जाए।

सरकारी धन के दोहरे इस्तेमाल को लेकर चिंता

स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों में यह भी शामिल है कि सड़क निर्माण के लिए एक बार बजट खर्च होने के बाद यदि कुछ समय में ही मरम्मत की जरूरत पड़ती है तो सरकारी धन पर अतिरिक्त भार पड़ता है।

लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता कमजोर होने की स्थिति में एक ही काम पर बार-बार सरकारी राशि खर्च होने की आशंका रहती है। हालांकि, किसी विशेष सड़क के मामले में गुणवत्ता में कमी या अनियमितता की पुष्टि तकनीकी जांच और संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही की जा सकती है।

नियमों के अनुसार मेंटेनेंस प्रावधान की होनी चाहिए स्पष्ट जानकारी

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण के साथ पांच साल के रखरखाव का प्रावधान किसी सरकारी नियम या अनुबंध का हिस्सा है तो संबंधित विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

लोग यह भी जानना चाहते हैं कि रखरखाव के लिए प्रस्तावित राशि किस आधार पर तय की गई है, सड़क की गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी किस अधिकारी की होगी और निर्माण के बाद सड़क के रखरखाव की वास्तविक जरूरत कैसे निर्धारित की जाएगी।

जनता को चाहिए मजबूत सड़क, सिर्फ कागजी गुणवत्ता नहीं

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि उन्हें कागजों में गुणवत्तायुक्त सड़क का उल्लेख नहीं, बल्कि जमीन पर मजबूत और टिकाऊ सड़क चाहिए। सड़क खराब होने पर आम लोगों को गड्ढों, धूल, जलभराव और दुर्घटनाओं जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

जनता की मांग है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन हो, काम की तकनीकी निगरानी की जाए और सरकारी धन के प्रत्येक खर्च का स्पष्ट हिसाब उपलब्ध कराया जाए।

अब सवाल यही है कि सड़क का निर्माण शुरू होने से पहले ही यदि उसके रखरखाव का एस्टीमेट तैयार है, तो इसकी जरूरत और आधार क्या है? क्षेत्र के लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को इस सवाल का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

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