आदिपुरुष पर भड़के काशी के संत, कहा- आस्था की मर्यादा से छेड़छाड़ अक्षम्य, पैसे देकर पाप न खरीदें


आदिपुरुष पर भड़के काशी के संत, कहा- आस्था की मर्यादा से छेड़छाड़ अक्षम्य, पैसे देकर पाप न खरीदें

वाराणसी। रामायण के कथानक पर बनी फिल्म आदिपुरुष के दृश्यों, कथानक और संवादों को लेकर काशी के संत समाज में भी आक्रोश है। संतों ने इसे मर्यादा के साथ खिलवाड़ बताते हुए अक्षम्य अपराध बताया है।आस्थावान हिंदू समाज से फिल्म को न देखने का आह्वान किया है।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि फिल्म के संवाद लेखक मनोज वास्तव में मुंतशिर ही था, जिसने शुक्ला बनने की कोशिश की। सनानत धर्म में तथ्यों से छेड़छाड़ और महापुरुषों का सरलीकरण करना, परमात्मा का सरलीकरण करना, अक्षम्य अपराध है। इस फिल्म के संवाद ऐसे हैं, जैसे मोहल्ले के टपोरी छाप लेखक प्रयोग करते हैं और यह हमें स्वीकार नहीं है। धर्म का क्षेत्र मर्यादा चाहता है। शब्दों का चयन शत्रुओं के लिए भी मर्यादित ही होता है और ऐसे मर्यादा विहीन लेखक और निर्देशक कभी स्वीकार नहीं किए जा सकते।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आदिपुरुष फिल्म में भारत की सनातन आस्था पर प्रहार करते हुए पौराणिक संदर्भों को अश्लीलता के साथ चित्रित किया गया है। यह भारत के महान आदर्शों के चरित्र से खिलवाड़ है, जिसे किसी कीमत पर स्वीकारा नहीं जा सकता है। हमने जिन रूपों में अपने देवी-देवताओं को देखा है, शास्त्रों में जो पढ़ा है, फिल्म में वैसा रूप नहीं दिखाया गया है। उनकी जो वाणी है, उनके जो शब्द हैं, वह भी हमारी मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं। इसका मतलब यह हो गया कि उस फिल्म में जो कुछ आप देख रहे हैं, वह दोष का कारण है। हम सनातनधर्मी हिंदुओं से यही कहेंगे कि पैसे देकर पाप न खरीदें। ‘हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।

यह भी पढ़ें :  पीपीजीसीएल प्रबंध निदेशक को विधायक बारा ने लगाई कड़ी फटकार

R. D. Diwedi


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now