Sawai Madhopur : गांव टोकसी एवं खानपुर बड़ौदा में चली रही भागवत कथाएं


गांव टोकसी एवं खानपुर बड़ौदा में चली रही भागवत कथाएं

टोकसी गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का साध्वी ऋतम्भरा प्रिया कुमारी व्रंदावन ने मधुर कंठ से भागवत कथा श्रवण कराया। कथा सुनने के लिए पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर पहुंचें। इस पुण्य अवसर पर उन्होने साध्वी प्रिया कुमारी को प्रणाम किया। गांव के पंच पटेलो ने माला एवं साफा पहनाकर अभिनंदन किया।
कथा वाचक साध्वी प्रिया ने बताया कि भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण का ही ग्रंथ अवतार है, जिसके 18 हज़ार श्लोकों में भगवान की अपने भक्तों पर करुणा का व्यापक वर्णन है। यह कथा सुनने से ना केवल मन का शुद्धिकरण होता है, बल्कि हृदय के अन्तःकरण में शांति स्थापित होती है तथा दुखों से मुक्ति मिलती है।
महाभारत के समय व्यथित अवस्था में जब द्रौपदी ने अपनी लाज की रक्षा के लिए कृष्ण का स्मरण किया तो भगवान ने उनके वस्त्र को बढ़ाते हुए द्रोपदी की लाज बचाई थी। मेरा अनुभव है कि भगवान का स्मरण करने से जीवन में जो भी बाधाएं आती हैं, वे स्वतः ही दूर हो जाती है।
पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर ने संबोधित करते हुए कहा कि आपको जब भी समय मिले भागवत कथा जरूर सुनें तथा अपने बच्चों को भी सुनाएं। जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियां आस्थावान और संस्कारवान बन सके।

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इसी प्रकार खानपुर बड़ौदा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा वाचक मुकेश कृष्ण शास्त्री श्री धाम गोवर्धन वालों ने कथा सुनाई।
इस दौरान पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर भागवत कथा में मुख्य अतिथि के रुप में पहुंचे। धाभाई परिवार की और से पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर का माला एवं साफा पहनाकर स्वागत किया गया। साथ ही राधा कृष्ण की तस्वीर भेट की।
कथा वाचक मुकेश कृष्ण महाराज ने कहा कि ने भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं और रासलीला का भावपूर्ण वर्णन किया और भगवान श्री कृष्ण की मनोरम झांकी का अवलोकन भी कराया है।
श्रीमद् भागवत कथा में सभी वेद वेदांग, उपनिषद, पुराण, वैदिक व धार्मिक धर्म शास्त्रों से जुड़ा सार समाहित है।
मुख्य अतिथि पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर ने संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा में भाग लेकर भक्तिरस लाभ लिया एवं जीवन की हर परिस्थिति में हमारा मार्गदर्शन करने वाले पवित्र ग्रंथ गीता का ज्ञान भी संतवाणी द्वारा सुनने को मिला।
श्रीमद्‍ भगवद्‍गीता: जैसा पवित्र नाम, वैसा ही पवित्र ज्ञान भी इस ग्रंथ से मिलता है। चूंकि परम सुख ज्ञान ही है, अत: गीता में समाज के हर वर्ग को सुख प्रदान करने के तत्व मौजूद हैं।
इस दौरान टोकसी में मुरली पटेल, रामेश्वर मीणा, मदननाथ मीना, भंवर सिंह, भरतलाल, ब्रह्म मीणा, खानपुर बड़ौदा में रामस्वरूप धाभाई, नीटू सिंह धाभाई, सोहनसिंह गुर्जर, धर्मसिंह, रामसिंह, श्याम लाल गार्ड, भरतु गुर्जर, घासीलाल बैंसला, मनोज कुनकटा, मनीष सिराधना मौजूद रहे।


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