सवाई माधोपुर में 2200 बच्चों को ‘नो-गो-टेल’ का पाठ, अजनबियों से सावधान रहने की दी सीख


विधिक जागरूकता शिविरों में बच्चों को अपहरण, बाल तस्करी, बाल श्रम और ऑनलाइन सुरक्षा से बचाव के उपाय बताए गए।

सवाई माधोपुर, 1 सितंबर 2026। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सवाई माधोपुर के तत्वावधान में मंगलवार को ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे’ के अवसर पर जिलेभर में ‘स्ट्रेंजर डेंजर- नो, गो, टेल’ विषय पर विशेष विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों के माध्यम से लगभग 2200 बच्चों को अजनबियों से सावधान रहने, अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने तथा किसी खतरे की स्थिति में तत्काल विश्वसनीय बड़े व्यक्ति से सहायता लेने की जानकारी दी गई।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सवाई माधोपुर न्याय क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों एवं पैनल अधिवक्ताओं ने पहुंचकर बच्चों को बाल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों और व्यवहारिक सावधानियों की जानकारी दी। अभियान का मुख्य संदेश था कि किसी अपरिचित व्यक्ति के प्रलोभन, लालच या बहकावे में न आएं और खतरा महसूस होने पर मना करें, सुरक्षित स्थान की ओर जाएं तथा घटना की जानकारी दें।

‘नो, गो, टेल’ के बताए तीन महत्वपूर्ण सूत्र

जागरूकता शिविरों में बच्चों को समझाया गया कि यदि कोई अपरिचित व्यक्ति उन्हें अपने साथ चलने, कोई वस्तु देने या किसी प्रकार का लालच देने का प्रयास करे तो ऐसी स्थिति में ‘नो, गो, टेल’ के सिद्धांत को अपनाना चाहिए।

बच्चों को बताया गया कि खतरा महसूस होने पर सबसे पहले स्पष्ट रूप से ‘नो’ यानी मना करना चाहिए। इसके बाद वहां से सुरक्षित स्थान की ओर ‘गो’ यानी चले जाना चाहिए और पूरी घटना की जानकारी किसी विश्वसनीय माता-पिता, शिक्षक या अन्य बड़े व्यक्ति को ‘टेल’ यानी बतानी चाहिए।

अपहरण और बाल शोषण से बचाव की दी जानकारी

शिविरों में बच्चों को अपहरण एवं शोषण से बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बिना जानकारी के कहीं नहीं जाना चाहिए और किसी संदिग्ध परिस्थिति में तुरंत अपने अभिभावक अथवा शिक्षक को जानकारी देनी चाहिए।

अपहरण के संभावित कारणों तथा इससे बच्चों के जीवन पर पड़ने वाले शारीरिक और मानसिक प्रभावों की जानकारी देते हुए स्वयं की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए प्रेरित किया गया।

बाल तस्करी और बाल श्रम पर भी किया जागरूक

कार्यक्रमों में बाल तस्करी, बाल श्रम, जबरन भीख मंगवाने और बच्चों के शोषण जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं के बारे में भी बच्चों को जागरूक किया गया।

बच्चों को बताया गया कि कानून बच्चों की सुरक्षा, देखभाल, संरक्षण, पुनर्वास और उनके सर्वोत्तम हित को विशेष महत्व देता है। किसी बच्चे के साथ अपराध या शोषण होने की स्थिति में उसे विधिक सहायता एवं संरक्षण प्राप्त करने का अधिकार है।

POCSO और किशोर न्याय कानून की दी जानकारी

जागरूकता शिविरों के दौरान बच्चों को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015, लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 तथा नालसा की ‘बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं’ योजना, 2024 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई।

न्यायिक अधिकारियों एवं पैनल अधिवक्ताओं ने बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए बताया कि किसी भी प्रकार के अपराध, शोषण या असुरक्षित स्थिति में सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।

सोशल मीडिया और ऑनलाइन सुरक्षा पर भी जोर

शिविरों में बच्चों को सोशल मीडिया के सुरक्षित और सावधानीपूर्वक उपयोग के बारे में भी जागरूक किया गया। उन्हें समझाया गया कि सोशल मीडिया पर अपना पता, मोबाइल नंबर, पासवर्ड, स्कूल से संबंधित जानकारी, निजी फोटो या अन्य व्यक्तिगत जानकारी अज्ञात लोगों के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

किसी अनजान व्यक्ति द्वारा ऑनलाइन दोस्ती, चैट, वीडियो कॉल अथवा मिलने के लिए दबाव बनाए जाने पर इसकी जानकारी तत्काल माता-पिता या शिक्षक को देने की सलाह दी गई।

जिले के विभिन्न विद्यालयों में हुए जागरूकता शिविर

सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय सहित विभिन्न तालुका क्षेत्रों के विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों और पैनल अधिवक्ताओं ने जागरूकता शिविर आयोजित किए। इनमें पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जटवाड़ा कलां, मैनपुरा, पढ़ाना, आटूण कलां, सुनारी, आलनपुर, दुब्बी बनास, खटुपुरा, बसोकलां, बनोटा, धनोली और ओलवाड़ा सहित विभिन्न विद्यालय शामिल रहे।

इसी प्रकार गंगापुर सिटी, महूकलां, बूचोलाई, वजीरपुर, बौंली, डाबर, मेईकलां, चौथ का बरवाड़ा, सेलूं, रामड़ी, लिवाली सहित अन्य विद्यालयों में भी बच्चों को बाल सुरक्षा और विधिक अधिकारों की जानकारी दी गई।

सावधानी और समय पर सूचना ही सबसे बड़ा बचाव

अभियान के माध्यम से बच्चों को संदेश दिया गया कि सावधानी, जागरूकता और समय पर सूचना देना बाल अपराधों से बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम है। बच्चों से अपील की गई कि वे स्वयं जागरूक रहने के साथ अपने साथियों और अन्य बच्चों को भी उनकी सुरक्षा एवं विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करें।

कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को केवल कानूनी जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी परिस्थितियों में सही निर्णय लेने के लिए तैयार करना भी रहा, जहां उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

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