श्रीमद् भागवत कथा का सप्तम दिवस: कृष्ण सुदामा मित्रता का किया बखान; भाई दूज का महत्व बताया


नारी पूजनीय जगत जननी पतिव्रता धर्म का महत्व बताया

गंगापुर सिटी। पंकज शर्मा। विजय पैलेस में चल रही श्रीमद् भागवत कथा की सप्तम दिवस बुधवार को भागवताचार्य परम पूज्य गोविंद भैया द्वारा अकरूर जी कथा प्रसंग सत्राजीत, समरा सुर प्रसंग भौमासुर वध की कथा कृष्ण सुदामा चरित्र का वर्णन किया। आचार्य ने कहा कि भगवान कृष्ण के तीन विवाह हुए रुक्मणी जामवंती और सत्यभामा सतराजीत की पुत्री सत्यभामा से विवाह हुआ। जामवंत को भगवान राम से युद्ध की इच्छा पूर्ति के लिए भगवान कृष्ण ने मल युद्ध किया जामवंत ने भगवान कृष्ण से अपनी बेटी जामवंती का विवाह किया। इसी प्रकार भौमासुर राक्षस वध करके उसकी कैद में 16100 कन्याओं को कैद छुड़ाया सभी कन्याओं का मन जान कर उनसे विवाह किया।

आचार्य ने कहा कि आजकल विवाहो मैं फिजूल खर्च किया जाता है। आज हम शास्त्र विधि को भूलकर दिखावे में संस्कारों को भूल रहे हैं। आचार्य द्वारा भाई दूज की कथा सुनाते हुए कहा कि कालंदी यमुना से विवाह किया जो सूर्य पुत्री एवं यमराज की बहन थी कथा में भाई बहन का भाई दूज का महत्व बताते हुए कहा जमुना जी ने अपने भाई यमराज को भोजन करा कर तिलक किया और हाथ में धागा बांधा तब यमराज ने कहा कि बहन मांगो क्या मांगती हो बहन ने कहा कि इस दिन को यादगार बना दो भैया तब भैया ने कहा कि जो कोई भाई दूज के दिन यमुना नदी में भाई बहन का हाथ पकड़कर कर स्नान करेगा। उसके सारे पाप धुल जाएंगे कृष्ण सुदामा चित्रण की सजीव झांकी सजाकर भजन और संगीत के माध्यम से कृष्ण सुदामा की मित्रता का वर्णन किया। किस प्रकार सुदामा घर से तीन मुट्ठी चावल लेकर भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचे भगवान कृष्ण ने दो मुट्ठी चावल खाए तब रुक्मणी बोली कि हमारे लिए भी तो छोड़ दे इस दृश्य को देखकर कथा पंडाल में सभी दर्शनार्थी भाव विभोर हो गए और भजनों पर झूमने लगे।

यह भी पढ़ें :  स्वर्गीय अभिषेक मीणा की पुण्य स्मृति में डे-नाइट संभाग स्तरीय ओपन वॉलीबॉल टूर्नामेंट का भव्य समापन

कृष्ण सुदामा के चित्रण पर श्रद्धालुओं ने अक्षत और दान दक्षिणाएं भेंट की कथा के मध्य परम पूज्य गुरु महाराज ने नसीब यानी भाग्यशाली किसे कहते हैं इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि जिस पर भगवान की कृपा हो जाए वही भाग्यशाली है। परमात्मा जिसको धन चाहिए धन देता है और जिसे भगवान की भक्ति चाहिए उसे भक्ति प्रदान करता है। हमारे यहां अतिथियों के स्वागत करने की शास्त्र अनुसार परंपरा है लेकिन आज विदेशियों को अतिथि बनाकर देश में आताताइयो आतंकवादियों को पनाह दी जा रही है। दंड देने के लिए अंग्रेजों के बनाए कानून कमजोर है। परम पूज्य गुरु जी महाराज में पति सेवा धर्म का महत्व बताया और कहा कि शास्त्रों में नारी पर हाथ उठाने की नीति नहीं है आपुती नारी का सम्मान के रूप में जगत जननी कहा है। आज हम सब ने विदेशी संस्कृति का कचरा कूड़ा इकट्ठा कर संस्कृति को भुला दिया है। हम सबको शास्त्र अनुसार ध्यान और कर्म करने चाहिए। उन्होंने स्त्री के पतिव्रत धर्म की शक्ति का बखान एक लघु कथा के माध्यम से बताया माता-पिता की बड़ों की सेवा करना और आदर करने की व्याख्या की।

श्रीमद् भागवत कथा में यदुवंशियों के आपस में लड़ने की कथा सुनाई भगवान कृष्ण अपने धाम को किस प्रकार गए उसका वर्णन किया शुकदेव पूजन व्यास पूजन के साथ कथा का समापन हुआ आज गुरुवार को पूर्णाहुति हवन यज्ञ के साथ भंडारा आयोजित होगा।


WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now