शाहपुरा में नामांकन के दौरान सियासी शक्ति प्रदर्शन, मीडिया नियमों पर सवाल


भाजपा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा की मौजूदगी में 15 वार्डों के प्रत्याशियों ने भरे नामांकन, सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद प्रवेश व्यवस्था पर उठे सवाल

शाहपुरा। पंचायत राज संस्थाओं के आम चुनाव को लेकर शाहपुरा में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पंचायत समिति सदस्य चुनाव के लिए नामांकन के तीसरे दिन गुरुवार को प्रत्याशियों में नामांकन पत्र दाखिल करने की होड़ दिखाई दी। इस दौरान भाजपा ने सभी 15 वार्डों के प्रत्याशियों के नामांकन के दौरान अपनी संगठनात्मक सक्रियता प्रदर्शित की। वहीं, नामांकन प्रक्रिया की कवरेज को लेकर जारी मीडिया दिशा-निर्देशों और उनके समान क्रियान्वयन पर भी सवाल उठे हैं।

रिटर्निंग अधिकारी एवं शाहपुरा उपखंड अधिकारी बनवारी लाल सिनसिनवार के अनुसार, नामांकन के तीसरे दिन कुल 34 नाम निर्देशन पत्र प्राप्त हुए। इसके साथ ही अब तक प्राप्त नामांकन पत्रों की संख्या 45 हो गई है। पंचायत समिति सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 अक्टूबर निर्धारित है। इस दिन दोपहर 3 बजे तक नामांकन स्वीकार किए जाएंगे, जबकि प्राप्त नामांकन पत्रों की संवीक्षा 17 अक्टूबर को होगी।

भाजपा विधायक की मौजूदगी में 15 वार्डों के प्रत्याशियों ने भरे पर्चे

नामांकन के तीसरे दिन शाहपुरा-बनेड़ा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा की मौजूदगी राजनीतिक चर्चा का विषय रही। विधायक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ उपखंड कार्यालय पहुंचे और पंचायत समिति शाहपुरा के सभी 15 वार्डों के भाजपा प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहे।

सभी वार्डों के प्रत्याशियों के साथ विधायक की मौजूदगी को भाजपा की चुनावी सक्रियता और संगठनात्मक एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देखा गया। नामांकन के दौरान पार्टी नेतृत्व की उपस्थिति से प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को समर्थन देने के साथ राजनीतिक संदेश देने का प्रयास भी नजर आया।

मीडिया के लिए जारी दिशा-निर्देशों में क्या कहा गया?

नामांकन प्रक्रिया के दौरान मीडिया की भूमिका और प्रवेश व्यवस्था को लेकर सवाल सामने आए हैं। भीलवाड़ा के जिला जनसंपर्क अधिकारी की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को पंचायत चुनाव के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया की कवरेज के लिए मीडियाकर्मियों को रिटर्निंग अधिकारी के कक्ष के बाहर तक ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी। निर्देशों में स्पष्ट किया गया था कि मीडियाकर्मी रिटर्निंग अधिकारी के कक्ष के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

जिला जनसंपर्क अधिकारी ने निर्वाचन कार्यक्रम की महत्ता को देखते हुए सभी मीडियाकर्मियों से निर्धारित व्यवस्था और निर्देशों का पालन करने की अपील की थी।

ऐसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य नामांकन प्रक्रिया में व्यवधान रोकना, कार्यालय में अनावश्यक भीड़ नियंत्रित करना और कार्यवाही को व्यवस्थित बनाए रखना हो सकता है। हालांकि, प्रवेश संबंधी प्रतिबंध लागू होने की स्थिति में उनके क्रियान्वयन में स्पष्टता और एकरूपता भी आवश्यक है।

सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल, प्रवेश व्यवस्था पर उठे सवाल

शाहपुरा में गुरुवार को नामांकन के दौरान खींचे गए फोटो और वीडियो राजनीतिक नेताओं के सोशल मीडिया खातों पर प्रसारित होने की बात सामने आई है। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि जब मीडियाकर्मियों को रिटर्निंग अधिकारी के कक्ष के अंदर जाने की अनुमति नहीं थी, तो तस्वीरें और वीडियो किस स्थान पर तथा किन परिस्थितियों में बनाए गए।

क्या संबंधित तस्वीरें और वीडियो कक्ष के बाहर बनाए गए थे? क्या प्रत्याशियों के साथ आए व्यक्तियों को निर्धारित प्रवेश सीमा तक ही अनुमति दी गई थी? क्या नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रवेश और फोटोग्राफी को लेकर सभी संबंधित पक्षों के लिए समान व्यवस्था लागू थी?

इन सवालों का उत्तर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर तस्वीरें और वीडियो किस स्थान पर बनाए गए, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

नामांकन के समय कितने व्यक्तियों को प्रवेश की अनुमति?

नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रत्याशी के साथ कितने व्यक्तियों को रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने की अनुमति है, इस विषय पर भी स्पष्टता आवश्यक है। यदि प्रवेश की संख्या निर्धारित है, तो उसका पालन प्रत्याशियों, उनके समर्थकों, राजनीतिक प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के मामले में लागू नियमों के अनुसार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

मीडिया के लिए जारी दिशा-निर्देशों और प्रत्याशियों के प्रवेश संबंधी नियमों के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है। मीडिया पर प्रतिबंध होने का अर्थ यह नहीं है कि अन्य सभी व्यक्तियों को स्वतः उसी स्थान पर प्रवेश या फोटोग्राफी की अनुमति मिल जाती है। प्रत्येक पक्ष पर लागू नियमों का निर्धारण संबंधित आदेशों और निर्वाचन प्रावधानों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

प्रशासन और निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण की अपेक्षा

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मीडिया की भूमिका चुनावी गतिविधियों की जानकारी जनता तक पहुंचाने और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े सवाल सामने लाने की भी है। वहीं, निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि नामांकन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप व्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो।

ऐसे में जिला प्रशासन, उपखंड प्रशासन और राज्य निर्वाचन आयोग से यह स्पष्ट किए जाने की अपेक्षा है कि नामांकन के दौरान मीडिया कवरेज, प्रवेश और फोटोग्राफी को लेकर कौन-से नियम लागू थे। यदि निर्देशों के उल्लंघन की कोई शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच तथ्यों के आधार पर की जानी चाहिए।

शाहपुरा में पंचायत समिति चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के बीच उठा यह मुद्दा केवल मीडिया के प्रवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, प्रशासनिक व्यवस्था की एकरूपता और निर्धारित नियमों के समान क्रियान्वयन से भी जुड़ा है। अब संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण और आगामी नामांकन प्रक्रिया में व्यवस्थाओं की स्पष्टता पर नजर रहेगी।

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