शाहपुरा के रामनिवास धाम में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ


18 से 24 सितंबर तक होगी कथा, संत मस्तरामजी महाराज करेंगे वाचन, पहले दिन भागवत महात्म्य का किया गया विवेचन

शाहपुरा।श्रीमद्भागवत का मंगलाचरण उस आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ माना जाता है, जिसमें कथा के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अनुभव करता है। भागवत महापुराण का महात्म्य यह संदेश देता है कि ईश्वर की कथा का श्रवण मन को निर्मल करता है और जीवन को सद्मार्ग की ओर ले जाता है। इसी आध्यात्मिक भावभूमि में शुक्रवार को रामनिवास धाम में श्रीमद्भागवत कथा का समारोहपूर्वक शुभारंभ हुआ।

रामस्नेही संप्रदाय की मर्यादाओं एवं परंपराओं के अनुरूप आयोजित यह कथा 18 से 24 सितंबर तक रामनिवास धाम की बारादरी में होगी। मालपुरा के संत मस्तरामजी महाराज कथा का वाचन करेंगे। कथा प्रतिदिन सुबह 9 बजे से 11:30 बजे तक तथा दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी।

शोभायात्रा के साथ कथा स्थल तक पहुंचाई भागवत पोथी

कथा के शुभारंभ से पहले रामनिवास धाम के कार्यवाहक भंडारी संत नवनितरामजी महाराज ने महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के समाधि स्थल स्तंभजी से श्रीमद्भागवत महापुराण की पोथी को कथा के आयोजक परिवार के जगदीश सोनी के सिर पर धारण कराया।

इसके बाद श्रीमद्भागवत महापुराण की पोथी को शोभायात्रा के रूप में लाल चौक होते हुए बारादरी तक ले जाया गया। बारादरी में पोथी को विधिवत विराजमान कर कथा का शुभारंभ किया गया।

शोभायात्रा में रामस्नेही संप्रदाय के संतों के साथ बड़ी संख्या में सत्संगी महिला-पुरुष शामिल हुए।

मंगलाचरण में भागवत महात्म्य का विवेचन

कथा के प्रथम दिन मंगलाचरण करते हुए संत मस्तरामजी महाराज ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं है, बल्कि इसके संदेश को जीवन में उतारने का माध्यम है।

उन्होंने कहा कि कथा श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति की भावना जागृत होती है और उसे अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध होता है। कथा के दौरान विभिन्न दृष्टांतों के माध्यम से भागवत के आध्यात्मिक संदेशों और उसके महात्म्य को समझाया गया।

संत मस्तरामजी महाराज ने कहा कि आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के 275वें दीक्षा दिवस के पावन अवसर पर शुरू हुई यह भागवत कथा सभी भगवत प्रेमियों के लिए मंगलकारी होगी।

संगीत और वाद्य यंत्रों के बजाय शब्द और साधना पर जोर

रामस्नेही संप्रदाय की परंपरा के अनुरूप श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन बिना संगीत और वाद्य यंत्रों के किया जा रहा है। यहां कथा के श्रवण, चिंतन और आध्यात्मिक संदेश को ही प्रमुखता दी गई है।

यह आयोजन रामस्नेही संप्रदाय की सादगीपूर्ण साधना परंपरा का परिचायक बना हुआ है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भागवत के आध्यात्मिक संदेशों को समझने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का अवसर मिल रहा है।

दोनों सत्रों में कथा में पहुंचने का आह्वान

कार्यवाहक भंडारी संत नवनितरामजी महाराज ने शाहपुरा के निवासियों एवं रामस्नेही सत्संगीजनों से 24 सितंबर तक प्रतिदिन दोनों सत्रों में आयोजित होने वाली कथा में पहुंचने का आह्वान किया।

उन्होंने श्रद्धालुओं से श्रीमद्भागवत के महात्म्य का श्रवण करने और आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की।

यह भी पढ़ें:


Aawaz Aapki News WhatsApp चैनल से जुड़ें:

सबसे तेज़ और ताज़ा खबरें सीधे अपने व्हाट्सएप पर पाएं।

WhatsApp अभी जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *