शाहपुरा में संस्कृत संभाषण शिविर के समापन पर संस्कृत के नवाचार पुस्तक का विमोचन
संस्कृत, संस्कृति और संस्कार देश की जरूरत है-कृष्ण गौड
शाहपुरा के आदर्श विद्या मन्दिर में आयोजित संस्कृत भारती चित्तौड़ प्रांत अजयमेरू विभाग के छह दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का समापन मंगलवार को प्रांत अध्यक्ष कृष्णकुमार गौड़, प्रांत मंत्री परमानंद शर्मा, राम मन्दिर के महंत सीताराम बाबा, आरएसएस के प्रांत बोद्विक प्रमुख सत्यनारायण कुमावत, वर्गाधिकारी तेजपाल उपाध्याय की मौजूदगी में हुआ। इस मौके पर संभागियों ने शिविर में सीखे प्रशिक्षण का प्रस्तुतिकरण किया। कार्यक्रम में अजमेर के डा. आशुतोष पारीक की संस्कृत के नवाचार पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इसमें कुल 190 संभागियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत को देव भाषा का दर्जा यूँ ही नहीं दिया गया है । यह दुनिया की सबसे महान और वैज्ञानिक भाषा है ।
संस्कृत भारती के प्रांत अध्यक्ष कृष्णकुमार गौड ने कहा कि विश्व के अनेक देशों में संस्कृत भाषा को ज्ञान व विज्ञान की भाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। संस्कृत, संस्कृति और संस्कार देश की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा को जन जन की भाषा बनाने के उद्देश्य से युवक, युवतियों में जाग्रति पैदा करने की आवश्यकता है। संस्कृत आज की आवश्यकता ही नहीं अपितु उसके संयोजन संवर्धन के लिए उचित कदम उठाने के लिए भी आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि आने वाला समय संस्कृत भाषा के उत्थान व विकास का है। संस्कृत भाषा मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने व मानवीय मूल्यों को विकसित करने वाली भाषा है।

आरएसएस के प्रांत बोद्विक प्रमुख सत्यनारायण कुमावत ने कहा कि संस्कृत भाषा पूर्णरूप से वैज्ञानिक व विशुद्ध है। संस्कृत भाषा राष्ट्रीयता की भावना को विकसित करने का कार्य करती है। वर्तमान में नासा ने भी संस्कृत भाषा को सातवीं पीढ़ी के कम्प्यूटर के लिए सबसे उपयुक्त भाषा मानी है। संस्कृत भाषा में नवीन शब्दों के निर्माण की अनन्त सम्भावनाएं हैं। ज्योतिर्विज्ञान का सूर्य सिद्धान्त विविध खगोलीय गणनाओं का आधार है। संस्कृत भाषा जीवन जीने की वास्तविक कलाओं का विकास करती है। हिन्दी भाषा का मूल संस्कृत ही है, पालि प्राकृत और अपभ्रंश के सोपानों से होते हुए हिन्दी का विकास हुआ।
सीताराम बाबा ने कहा कि संस्कृत के बिना जीवन संभव नहीं है। जन्म से लेकर मृत्यु तक संस्कृत भाषा की जरूरत होती है। मुख्यवक्ता प्रांत मंत्री परमानंद शर्मा ने सरल एवं दैनिक जीवन में संस्कृत प्रयोग पर बल देते हुए कहा कि गुरुकुल ऐसा प्रतिभा का स्थल है यहां आधुनिक की ही नहीं अपितु प्राचीन परंपराओं का भी संरक्षण संवर्धन उचित प्रकार से होता है। शिविर वर्गाधिकारी तेजपाल उपाध्याय ने विगत 6 दिन के अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि संस्कृत भाषा को जन जन तक पहुंचाने के लिए संस्कृत भारती पूर्ण रूप से प्रयासरत है। संस्कृत देश का गौरव है।
वर्ग संयोजक परमेश्वर प्रसाद कुमावत ने आभार व्यक्त किया। देशराज ने संचालन किया।
समारोह में आरएसएस के जिला संघचालक शंकरलाल तोषनीवाल, संचिना कला संस्थान के अध्यक्ष रामप्रसाद पारीक, महासचिव सत्येंद्र मंडेला, प्रताप सेवा संस्थान के सचिव कैलाशसिंह जाड़ावत, भाविप के पूर्व अध्यक्ष जयदेव जोशी, प्रेस क्लब के सचिव भेरूलाल लक्षकार, कोषाध्यक्ष सुर्यप्रकाश आर्य आदि मौजूद रहे।
मूलचन्द पेसवानी

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