प्रयागराज के शंकरगढ़ विकास खंड परिसर में मंदिर के सामने गंदगी मिलने पर सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, सफाईकर्मियों की भूमिका और अधिकारियों की जवाबदेही पर मांगा गया स्पष्टीकरण
प्रयागराज। शंकरगढ़ विकास खंड परिसर में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिसर में स्थित भगवान भोलेनाथ के प्राचीन मंदिर के सामने गंदगी का अंबार लगा होने का मामला सामने आया है। इससे ब्लॉक प्रशासन की सफाई व्यवस्था और स्वच्छता अभियान के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक ओर सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर शंकरगढ़ ब्लॉक परिसर में मंदिर के सामने गंदगी होने की शिकायत सामने आई है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर सफाई व्यवस्था की निगरानी और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मंदिर परिसर में गोबर और कूड़े का ढेर
मिली जानकारी के अनुसार, मंदिर के सामने जमीन पर जगह-जगह गोबर, कूड़ा और धूल फैली हुई दिखाई दे रही है। दैनिक विद्रोही सामना के कैमरे में कैद तस्वीरों में परिसर की स्थिति सामने आने का दावा किया गया है।
मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को इस गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। इसके अलावा, ब्लॉक कार्यालय में अपने काम से आने वाली महिलाओं को भी इसी रास्ते से आवागमन करना पड़ता है। ऐसे में मंदिर और कार्यालय परिसर में नियमित सफाई की आवश्यकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मंदिर जैसे धार्मिक स्थल के सामने गंदगी जमा होना स्वच्छता व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। स्थानीय परिसर में सफाई की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह भी जरूरी है कि नियमित सफाई, कूड़े के निस्तारण और व्यवस्था की निगरानी पर ध्यान दिया जाए।
45 हजार रुपये वेतन के दावे के बीच सफाई व्यवस्था पर सवाल
शंकरगढ़ ब्लॉक में तैनात सफाईकर्मियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, यहां तैनात सफाईकर्मियों को 45,000 रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाता है। हालांकि, इस वेतन संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद ब्लॉक परिसर में गंदगी की स्थिति ने सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विकास खंड मुख्यालय परिसर में स्थित मंदिर के सामने ही सफाई की उचित व्यवस्था नजर नहीं आ रही है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही होगी। इस मुद्दे पर सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी और उनके कार्यों की निगरानी को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
कुछ सफाईकर्मियों पर कार्यालय में बाबूगिरी करने के आरोप
ब्लॉक से जुड़े सूत्रों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर दावा किया कि कुछ सफाईकर्मी ब्लॉक कार्यालय में ही मौजूद रहकर बाबूगिरी के काम में व्यस्त रहते हैं और फील्ड में जाकर सफाई संबंधी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करते।
इन आरोपों के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि कर्मचारी अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में सफाई कार्य नहीं कर रहे हैं, तो उनकी निगरानी कौन कर रहा है। साथ ही, यह भी पूछा जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों की ओर से ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की जाती है।
हालांकि, सफाईकर्मियों के कार्यालय में बैठकर बाबूगिरी करने और फील्ड में नहीं जाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके और सफाई व्यवस्था में सुधार हो सके।
अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
विकास खंड परिसर में अधिकारियों की आवाजाही रहती है। ऐसे में मंदिर के सामने गंदगी होने को लेकर प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर में सवाल किया गया है कि यदि अधिकारी रोजाना इसी मंदिर के सामने से गुजरते हैं, तो उनकी नजर इस स्थिति पर क्यों नहीं पड़ती।
इस मामले को लेकर ब्लॉक प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर यह मांग सामने आई है कि स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए और यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जनता में इस स्थिति को लेकर नाराजगी होने का दावा भी किया गया है। आरोप है कि स्वच्छता की स्थिति और जमीनी व्यवस्था के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित ब्लॉक प्रशासन का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
जिलाधिकारी प्रयागराज से जांच और कार्रवाई की मांग
शंकरगढ़ विकास खंड परिसर में मंदिर के सामने गंदगी की स्थिति को लेकर जिलाधिकारी प्रयागराज से मामले का संज्ञान लेने की मांग की गई है। मांग है कि परिसर की सफाई व्यवस्था की जांच कराई जाए और सफाईकर्मियों की कार्यप्रणाली तथा अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जाए।
इसके साथ ही, यदि जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही या किसी अधिकारी की जिम्मेदारी सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। परिसर में नियमित सफाई सुनिश्चित करने और श्रद्धालुओं तथा कार्यालय में आने वाले लोगों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
अब इस मामले में संबंधित प्रशासन की ओर से जांच, सफाई व्यवस्था में सुधार और उठाए गए सवालों पर स्पष्टीकरण का इंतजार है।
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