शंकरगढ़ बाजार में साप्ताहिक बंदी बेअसर, अतिक्रमण से रोजाना लग रहा जाम


शिवराजपुर में हर महीने की पहली तारीख को बाजार बंद, शंकरगढ़ में 365 दिन खुली रहती हैं दुकानें, फुटपाथ पर कब्जे से राहगीर और वाहन चालक परेशान

प्रयागराज। प्रयागराज के नगर पंचायत शंकरगढ़ में बाजार की अव्यवस्थाओं को लेकर नगर पंचायत प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर बाजार में साप्ताहिक बंदी का आदेश प्रभावी नजर नहीं आ रहा है, वहीं दूसरी ओर दुकानदारों की ओर से सड़क किनारे की पटरियों और फुटपाथ पर सामान रखने से जाम की समस्या लगातार बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने शंकरगढ़ और शिवराजपुर बाजार की व्यवस्था की तुलना करते हुए सवाल उठाया है कि जब छोटा बाजार शिवराजपुर बंदी के नियम का पालन कर सकता है, तो नगर पंचायत शंकरगढ़ में ऐसा क्यों नहीं हो रहा?

शिवराजपुर में हर महीने की पहली तारीख को रहती है बाजार बंदी

स्थानीय स्तर पर बाजार बंदी की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। शंकरगढ़ की तुलना में छोटा बाजार शिवराजपुर के दुकानदारों ने आपसी सहमति और अनुशासन के आधार पर तय कर रखा है कि हर महीने की पहली तारीख को पूरा बाजार बंद रहेगा।

बताया जाता है कि त्योहार हो या शादी का सीजन, शिवराजपुर में हर महीने की पहली तारीख को दुकानें बंद रहती हैं। इससे दुकानदारों के साथ-साथ दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी आराम और अवकाश मिल जाता है। यहां दुकानदार तय नियम का पालन करते हैं।

इसके विपरीत नगर पंचायत शंकरगढ़ में साल के 365 दिन बाजार खुला रहने की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रम विभाग और जिला प्रशासन के आदेश के बावजूद यहां साप्ताहिक बंदी का पालन नहीं कराया जा रहा है।

साप्ताहिक बंदी के आदेश पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार, श्रम विभाग और जिला प्रशासन की ओर से नगर पंचायत क्षेत्र में दुकानों की साप्ताहिक बंदी अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है, ताकि दुकानों में काम करने वाले श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश मिल सके। इसके बावजूद शंकरगढ़ बाजार में किसी भी दिन एक साथ दुकानें बंद दिखाई नहीं देतीं।

लोगों का सवाल है कि जब शिवराजपुर जैसा छोटा बाजार आपसी सहमति से बंदी का पालन कर सकता है, तो नगर पंचायत शंकरगढ़ में यह व्यवस्था लागू क्यों नहीं हो पा रही है? क्या यहां के दुकानदारों के लिए कोई अलग नियम है?

अतिक्रमण से फुटपाथ गायब, सड़क पर चलने को मजबूर राहगीर

शंकरगढ़ बाजार की दूसरी बड़ी समस्या अतिक्रमण है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई दुकानदारों ने अपनी दुकान का सामान बाहर सड़क किनारे की पटरी और फुटपाथ पर फैला रखा है। दुकान का सामान अधिक से अधिक लोगों को दिखाई देने की सोच के चलते कपड़े, बर्तन, जूते-चप्पल, खाद-बीज के बोरे, सीनरी, पूजा और श्रृंगार का सामान सड़क के दोनों ओर रखा जाता है।

इसके अलावा फल-सब्जी के ठेले भी सड़क किनारे और फुटपाथ पर खड़े रहते हैं। इससे पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ की जगह ही नहीं बचती और उन्हें सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

आमने-सामने वाहन आने पर लग जाता है जाम

सड़क की दोनों पटरियों पर सामान रखे होने के कारण बाजार में वाहनों के आवागमन के लिए जगह कम पड़ जाती है। जैसे ही ऑटो रिक्शा और चार पहिया वाहन आमने-सामने आते हैं, जाम की स्थिति बन जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार में हर 10 मिनट के अंतराल पर जाम जैसी स्थिति बन जाती है। इससे एंबुलेंस, स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों और महिलाओं को निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पैदल राहगीरों और वाहन चालकों को भी बाजार से गुजरने में काफी दिक्कत होती है।

नगर पंचायत प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

शंकरगढ़ अब नगर पंचायत बन चुका है। यहां अधिशासी अधिकारी (ईओ), चेयरमैन और अतिक्रमण हटाने के लिए दस्ता भी मौजूद है। इसके बावजूद बाजार में अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के नाम पर कभी-कभी मुनादी कराकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, लेकिन अगले ही दिन बाजार की स्थिति पहले जैसी हो जाती है।

लोगों ने आरोप लगाया है कि नगर पंचायत प्रशासन अतिक्रमण के मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है। कुछ स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि अतिक्रमण करने वालों में कुछ लोग सत्ता से जुड़े हैं या चंदा देने वाले हैं, जिसके चलते प्रशासन मौन बना हुआ है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

साप्ताहिक बंदी और अतिक्रमण को लेकर क्या हैं कानूनी प्रावधान?

स्थानीय लोगों ने उत्तर प्रदेश दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम के तहत साप्ताहिक बंदी को अनिवार्य बताते हुए नियमों के उल्लंघन पर 500 से 1000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान होने की बात कही है।

वहीं नगर पालिका अधिनियम के तहत फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाने और सामान जब्त करने की कार्रवाई का अधिकार नगर पंचायत को होने की बात भी उठाई गई है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन के सामने रखीं मांगें

शंकरगढ़ बाजार की अव्यवस्था से परेशान क्षेत्रीय लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन से कई मांगें रखी हैं।

  • शिवराजपुर की तर्ज पर शंकरगढ़ बाजार की साप्ताहिक बंदी तत्काल निर्धारित की जाए और उसका सख्ती से पालन कराया जाए।
  • बाजार की दोनों पटरियों पर हुए अतिक्रमण को हटाकर फुटपाथ खाली कराए जाएं।
  • बाजार में नो पार्किंग और नो अतिक्रमण के बोर्ड लगाए जाएं।
  • अतिक्रमण दोबारा न हो, इसके लिए प्रतिदिन एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाए।
  • जाम की समस्या के समाधान के लिए बाजार में सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक पुलिस की तैनाती की जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक बाजार में साप्ताहिक बंदी सुनिश्चित नहीं होगी और अतिक्रमण के खिलाफ नियमित कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक शंकरगढ़ बाजार में जाम और अव्यवस्था की समस्या बनी रहेगी। अब देखना यह है कि नगर पंचायत प्रशासन इन समस्याओं को लेकर कब प्रभावी कदम उठाता है।

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