शिवमहापुराण कथा ज्ञान का अपार समुन्दर है,जो इसमें गोता लगाएगा वह भवसागर से पार हो जाएगा-व्यास बिनोद त्रिपाठी


शिवमहापुराण कथा ज्ञान का अपार समुन्दर है,जो इसमें गोता लगाएगा वह भवसागर से पार हो जाएगा-व्यास बिनोद त्रिपाठी

प्रयागराज। मनुष्य का जीवन बिना भक्ति और नारायण के आराधना के वेकार है।शिवमहापुराण कथा ज्ञान का अपार समुन्दर है,जो इसमें गोता लगाएगा वह भवसागर से पार हो जाएगा उक्त उद्गार 9 दिवसीय शिवमहापुराण कथा के समापन के दिन सर्वेश्वर हनुमान मंदिर नारीबारी में बुधवार को सायं कथा वाचक व्यास विनोद त्रिपाठी ने मुख्य यज्ञमान कृष्णकली एवं पंडाल में मौजूद श्रोताओं से कहीं। व्यास बिनोद त्रिपाठी वाराणसी ने नौ दिन के कथा के साथ सभी भक्तों से जीवन में 9 कार्यों को करने एवं 9 कार्यों को ना करनें का उपदेश दिया जिसमें करनें वाले कार्यों में
१ वर्ष में एक बार गौ खुर में बरसात के भरे जल से अभिषेक करना चाहिए।
२ सर्वाधिक पूजन जीवन में स्वयं करें।
३ कुछ समय एकांत में भक्ति अवश्य करें।
४ शिवमन्दिर में एक बार तांबे का पात्र अवश्य दान करें।
५ एक बार सिगभी (ओस) के बूंद से ठंडे माह में शिव अभिषेक अवश्य करें।
६ अनाथ लोगों के पिण्ड दान में सहयोग अवश्य करना चाहिए।
७ एक शिव महापुराण श्लोक कम से कम घरों में लिखकर अवश्य रखें। चाहें 8 अक्षर का ही हो
८ वर्ष में एक बार कम से कम केले के पत्ते में भोजन अवश्य करना चाहिए।
९ पीपल (वासूदेव) की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
यह नौ कार्य जीवन में नहीं करनी चाहिए
१ फुलवारी (पुष्प वाटिका) में आग नहीं जलाना चाहिए।
२ पक्षियों को कभी नहीं मारना चाहिए।
३ किसी की निंदा और प्रसंसा दोनों नहीं करना चाहिए।
४ ध्यान पूजा-पाठ में बैठे व्यक्ति को प्रणाम नहीं करना चाहिए।
५ खड़ी हुई लक्ष्मी घर में नहीं रखनी चाहिए।
६ खण्डित मूर्ति घर में नहीं रखनी चाहिए।
७ भोजन बनाते वक्त कुछ खाना चबाना नहीं चाहिए।
८ गीले पैर सिर उत्तर करके नहीं सोना चाहिए।
९ पूजा-पाठ का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।
शिवमहापुराण कथा के अंतिम दिन सैकड़ों क्षेत्रीय भक्तों का हुजूम उमड़ा भक्तों ने आरती के बाद प्रसाद लेकर घरों में गुरूवार को भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कथा वाचक पं.अभिषेक हरिकिंकर महराज,राजाराम चतुर्वेदी,कान्हा चतुर्वेदी, बलराम चौबे, महेन्द्र कुमार शुक्ल,सूर्यकांत शुक्ल, अशोक मिश्र, प्रमोद बाबू झा,दिलीप कुमार चतुर्वेदी, विकास शुक्ल, राजेश केशरवानी,विनय शुक्ला, घनश्याम शुक्ल, बैजनाथ केसरवानी आदि भारी संख्या में भक्तगण मौजूद रहें।


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