संगठन में ही शक्ति है:- श्री हरि चैतन्य महाप्रभु


बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचारों को रोकने को सभी आवाज़ उठाऐं

कामां 24 दिसंबर|तीर्थराज विमल कुण्ड स्थित श्री हरि कृपा आश्रम के संस्थापक एंव श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात हरि चैतन्य पुरी ने आज यहाँ श्री हरि कृपा आश्रम में विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा
कि संगठन में ही शक्ति है। आप संगठित रहेंगे तो कोई ताक़त तुम्हें तोड़ने की सामर्थ्य नहीं रखेगी। अंगीठी में से सबसे बड़ा व ज़्यादा जलने वाला अंगारा भी अलग कर दो तो जल्द ही राख हो जाएगा,अंगीठी में मिलकर देर तक आग रहेगी। उन्होंने कहा कि इच्छाओं का, कामनाओं व आवश्यकताओं का कोई अंत नहीं। प्रभु मुझसे पूछे जो इच्छा हो वह वरदान माँगे लो तो मैं प्रभु से कहूँगा कि सबसे पहले मेरी माँगने की इच्छा व सभी इच्छाएँ ही समाप्त कर दो। इच्छाएँ अधिक हो तो व्यक्ति हैवान, इच्छाएँ सीमित हो तो वह इंसान तथा समाप्त हो जाए तो व्यक्ति भगवान ही है। अपने दोष जिसे नहीं दिखते वह हैवान है। दोष दूर कर लें तो व्यक्ति इंसान तथा जिसमें कोई दोष न रहे वह तो भगवान ही है।

अपने दिव्य प्रवचनों में उन्होंने कहा कि विश्व बंधुत्व का भाव रखती है भारतीय संस्कृति। सर्वे भवन्तु सुखिनः का भाव रखती हैं भारतीय संस्कृति। उस परमात्मा से प्रार्थना करूँगा कि वह सर्वशक्तिमान सबको सन्मति दे। देश व विश्व में शांति का साम्राज्य स्थापित हो सके। आज सारे विश्व को शांति की आवश्यकता है। शांति मिलती है परन्तु दुर्भाग्यवश हम उसे स्थापित नहीं कर पाते। सुख और शांति विचारों में है संतों व गुरुओं की शरण में है। यदि इंद्रियों पर नियंत्रण न हुआ तो भी हम शांति प्राप्त नहीं कर सकते। अच्छा बोलो, अच्छा सुनो, अच्छा देखो, अच्छा संग करो, अच्छा विचारो तथा कल्याणकारी संकल्प करो। यदि परमात्मा का स्मरण नहीं है तो हम कहीं भी शांति नहीं पा सकते हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं व अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों से हम सभी के हृदय व्यथित हैं । बांग्लादेश सरकार को इसके लिए कठोर कदम उठाने चाहिऐं । हर भारतीय को भी बिना किसी भेदभाव के विरोध के स्वर उठाने चाहिऐं। सनातन धर्म सभी के कल्याण की बात हमेशा से करता है । धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं। अफ़सोस आज़ धर्म के नाम पर लोगों को तोड़ने व बाँटने की कोशिश की जाती है । सभी धर्म प्रेम व भाईचारे का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ परंतु धर्म के नाम पर आतंक व हिंसा फैलाने के प्रयास अनुचित है।सभी को भी वास्तविकता समझनी चाहिए व इस हिंसा के तांडव को बंद करने में अपना समर्थन व सहयोग देना चाहिए। आज वर्तमान समय में देश में जो जातिवाद के नाम पर वाद विवाद फैल रहा है उसको मिटाकर आपस में प्रेम व सौहार्द का वातावरण बनाकर आपस में मिल जुलकर रहने का संदेश दिया।


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