सवाई माधोपुर 5 अप्रैल। संकट मोचन हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित राम कथा के सप्तम दिवस की कथा में भरत द्वारा पिता के निधन पर शोक व्यक्त किया उन्होंने दशरथ के मृत्यु एवं श्रीराम लक्ष्मण जानकी के वन गमन के लिए स्वयं को दोषी मानकर पश्चाताप किया तथा राज्य गृहण करने के लिए इंकार किया।
भरत को विलखता देख गुरु वशिष्ठ ने कहा सुनहु भरत भावी प्रबल बिलख कहेहु मुनि ना थ हानि लाभ जीवन मरन विलख कहेहु मुनि नाथ हानि लाभ जीवन मरन यश अपयश विध हाथ उधर श्रीराम भारद्वाज मुनि के आश्रम में दर्शन कर वन को आगे प्रस्थान किया। भरत राजा दशरथ के पार्थिव शरीर की अन्तेष्टि कर श्रीराम को मनाने तीनों माताओ सहित गुरु जन अवज समाज को साथ लेकर वन को प्रस्थान किया। भरतजी ने कहा में श्रीराम को वापस लेकर ही आऊंगा तथा अवध का दुःख दूर करूंगा भरत भारद्वाज मुनि से वन को गये वहाँ उन्होंने श्रीराम को राज तिलक कर खडाऊ लेकर अवध आए भरत की विकल स्थिति पर सब श्रौता ओं की अश्रुधार बह गई वृन्दावन के कथा महाराज अवधेश कृष्ण ने भाव पूर्ण कथा का वर्णन किया।
कथा के प्रारंभ में पूरण गुप्ता पंडित शिवशंकर शर्मा जितेन्द्र शर्मा प्रवीण मथुरिया सहित कई भक्तों ने पूजा में भाग लिया।

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