एमजी चिकित्सालय में वेतन विवाद को मिला विराम, अधीक्षक डॉ. अरुण गोड़ ने मानवीय दृष्टिकोण से किया समाधान

तीन माह से लंबित था वेतन, नर्सिंग कर्मियों ने कार्य बहिष्कार की दी थी चेतावनी; अधीक्षक की पहल पर एक माह का वेतन जारी करने पर बनी सहमति

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। महात्मा गांधी चिकित्सालय में पिछले तीन माह से चल रहे वेतन विवाद का समाधान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण गोड़ की सूझबूझ और संवेदनशीलता से हो गया है। बुधवार को नर्सिंग कर्मियों के विरोध के बाद यह मामला सुलझा लिया गया।

क्या था मामला?

राजस्थान नर्सेज यूनियन के जिलाध्यक्ष लक्की ब्यावट के नेतृत्व में दोपहर 1 बजे नर्सिंग कार्मिकों ने अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। आरवीआरएस मेडिकल कॉलेज के 86 नर्सिंग कर्मचारियों ने पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिलने पर अपना कार्य छोड़ने की चेतावनी दी थी।

अधीक्षक की त्वरित पहल

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. अरुण गोड़ ने तुरंत प्रभावी कदम उठाए:

  • वेतन भुगतान: एक माह का वेतन शीघ्र जारी करने पर सहमति बनी।

  • प्रक्रिया: मेडिकल कॉलेज के अकाउंटेंट से चर्चा कर वेतन आहरण की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए।

  • अन्य लंबित मांगें: सरेंडर और एरियर के मुद्दे पर भी आश्वासन दिया गया कि बजट की मांग कर दी गई है और उपलब्धता के आधार पर भुगतान किया जाएगा।

नर्सिंग यूनियन ने जताया आभार

जिला प्रवक्ता गिरिराज लढा ने बताया कि चिकित्सा अधीक्षक की सकारात्मक कार्यशैली से नर्सिंग कर्मियों को बड़ी राहत मिली है। इस दौरान कार्यकारी अध्यक्ष ललित जीनगर, उपाध्यक्ष करण सिंह सिसोदिया सहित अनेक पदाधिकारी और नर्सेजकर्मी उपस्थित रहे।

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