विधिवत पूजा-अर्चना से भक्तों की मनोकामनाएं होती है पूर्ण


बरियारी कला यमुना नदी में स्थित हनुमान मंदिर में लगती है भक्तों की अपार भीड़

विधिवत पूजा-अर्चना से भक्तों की मनोकामनाएं होती है पूर्ण

प्रयागराज। ब्यूरो राजदेव द्विवेदी। दो जनपदों के बीच यमुना नदी के बीच विलुप्त स्थानों में से एक रमणीक स्थल जनपद चित्रकूट और प्रयागराज के प्रतापपुर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर हनुमान जी का यह स्थान प्राकृतिक रूप से भी सुहावना है। इस स्थल पर बालू मोरंग के बजाय पत्थर की शिलाओं का होना भी अद्भुत है जो मां कालिंदी के रूप और स्वरूप को विहंगम बना देता है। वहां मौजूद स्थानीय पुजारियों द्वारा जानकारी के अनुसार जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने धौलागिरी पर्वत जा रहे थे तो सूर्यपुत्री यमुना ने अपने भाई सूर्य पुत्र हनुमान जी को कुछ देर के लिए विश्राम हेतु रोका और अनुरोध किया कि विग्रह रूप में सदा सदा के लिए बिराजो तभी से लेटे हनुमान जी की लेटी हुई मूर्ति प्रयागराज और परिक्रमा मार्ग बरहा के हनुमान जी की तरह यहां भी हनुमान जी की लेटी हुई मूर्ति विराजमान है। ऐसी मान्यता है कि विधिवत पूजा अर्चना करने से लोगों की समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। बता दें कि यमुना नदी में बाढ़ आने पर तकरीबन 4 महीने तक पूरा मंदिर जल मग्न हो जाता है ऐसे में भक्तगण घाट के ऊपर से ही हाजिरी लगाते हैं। बारिश के बाद जल सिमटने पर लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर पथरीले घाट से मंदिर तक जाने का मार्ग भी बन जाता है। वहीं मंदिर के समीप भक्तगणों ने भगवान बजरंगबली की महत्ता बताते हुए कहा कि प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को भक्तों का तांता लगा रहता है। और यहां पर अक्सर भंडारा चलता रहता है जिसके कारण आज हम लोग भी यहां पर भंडारा का कार्यक्रम रखे हुए हैं ताकि भंडारा के माध्यम से ही भगवान बजरंगबली का महाप्रसाद जो कि अमृत के समान है हम लोगों को भी ग्रहण करने का सौभाग्य प्राप्त हो सके । बरियारी कला के हनुमान जी का मंदिर विलुप्त स्थानों में से एक रमणीक स्थल है। मंदिर प्रांगण के साथ ही शनि देव धाम स्थित है जहां लोग पूजा अर्चना कर शनिदेव का भी आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।


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