ये वो धरती जहां पे रामचरण की रज है- डॉ.मण्डेला


शाहपुरा|श्री रामनिवास धाम में आयोजित 260वें फूलडोल मेले के समापन अवसर पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि एवं साहित्यकार डॉ.कैलाश मण्डेला ने अपने काव्यपाठ से सभी को आनंदित और भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि राम नाम और धाम की सीमाओं का विस्तार दिग्दिगंत में व्याप्त है। शाहपुरा को जिला बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही धाम की पीठ का शाहपुरा में होना ही पर्याप्त है। इस धरती की परंपराओं का बखान करते हुए कविता में कहा- “ये वो धरती जहां पे रामचरण की रज है। “ये वो धरती जहां पैदा हुए कईं दिग्गज है।” धर्म सभा में सम्प्रदाय के संतों और भक्तों की उपस्थिति में मण्डेला ने धाम में पवित्र आचरण पर बल देते हुए कहा कि इस पावन स्थल पर कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए वर्ना जीवन में इसका नुकसान हो सकता है। “राम के नाम की धुन को हृदय गुंजा देना।
रहें आनंद से सदैव वो मज़ा देना।
करे अपराध झूठ बोलने का दर पे कोई,
ऐसे हर झूठ की प्रभु उसे सजा देना।।
रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश आचार्य राम दयाल जी महाराज, जैतारण के संत भगतराम जी महाराज, सोजत के रामस्वरूप जी महाराज, चित्तौड़गढ़ के दिग्विजय राम जी महाराज, बाल संत आनंद राम जी महाराज ने भी धर्म सभा को अपने प्रवचनों से लाभान्वित किया।


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