मोमबत्ती जलाकर नौशेरा के शेर ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को दी श्रद्धांजलि


मोमबत्ती जलाकर नौशेरा के शेर ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को दी श्रद्धांजलि

सवाई माधोपुर 4 जुलाई। नौशेरा के शहीद ब्रिगेडियर उस्मान की पुण्यतिथि के अवसर पर सोमवार शाम को वतन फाउंडेशन द्वारा हुसैन खान आर्मी के नेतृत्व में रेलवे स्टेशन सर्कुलेटिंग एरिया में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। फाउंडेशन सदस्यों एवं आमजन द्वारा मोमबत्ती जला कर श्रद्धांजलि प्रस्तुत की।
इस अवसर पर फाउंडेशन के प्रवक्ता मोइन खान ने ब्रिगेडियर उस्मान के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1947-48 में हुई भारत-पाकिस्तान की जंग पहली जंग है जिसे भारत ने आजादी के बाद लड़ा। इस जंग में शहीद होने वाले ब्रिगेडियर उस्मान, उस जंग में शहीद होने वाले सबसे बड़े अफसर थे.ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का जन्म 15 जुलाई, 1912 को आजमगढ़ में हुआ, आजादी के बाद मिलिट्री के अफसरों को ये चुनने की आजादी दी गयी कि वो हिन्दुस्तान में रहें या पाकिस्तान चले जाएँ।
ब्रिगेडियर उस्मान ने हिन्दुस्तान ही में रहना पसंद किया और आजादी के फौरन बाद हुई जंग में पाकिस्तान से लोहा लेते हुए वो मुल्क पे कुर्बान हो गए। पाकिस्तानी फौजियों से लड़ते हुए उनका निधन 3 जुलाई, 1948 को नौशेरा में हुआ। उन्हें उनकी कुर्बानी की याद में नौशेरा का शेर भी कहा जाता है। बाद में उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
प्रोफेसर रामलाल बैरवा ने जानकारी देते हुए कहा कि सादगी की जिन्दगी पसंद करने वाले उस्मान हर प्रकार के नशे से दूर रहते थे। उनके बारे में तब के प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु ने कहा था कि मुल्क के सेकुलरिज्म की यही पहचान है। इस अवसर पर संजय सिसोदिया, अमीन खान, मुन्ना खान, सलीम खान, सोनू खान, अरूज, हुसैन अली हुसैन आदि उपस्थित रहे।


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