भीलवाड़ा|हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मन्दिर भीलवाड़ा में चैत्रीय नवरात्रि मे 31 वैदिक ब्राह्मणों के द्वारा दो शतचंडी, सवा लक्ष महामृत्युंजय जप, नवान्हपारायण रामचरितमानस पाठ, नित्य मण्डल पूजन, नित्य रुद्राभिषेक, नित्य दुर्गा हवन और कनकधारा पाठ, श्रीसुक्त पाठ, गोपाल सहस्रनाम पाठ आचार्य सत्यनारायण शर्मा के नेतृत्व में काशी वृन्दावन के विद्वानों द्वारा संपादित होंगे। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने बताया कि हिन्दू राष्ट्र की कामना सहित सनातन की रक्षार्थ नवरात्रि मे विविध पूजन पाठ पारायण हो रहे है। स्वामी जी ने बताया कि शक्ति की आराधना का पावन पर्व चैत्रीय नवरात्रि का शुभारंभ दिनांक 30 मार्च से घट स्थापना के साथ होगा। जिसमें शक्ति की आराधना को सर्वोत्तमता प्रदान की गई है। इसमें अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करना श्रेष्ठता का प्रतीक माना गया है। ज्योति शब्द संस्कृत से लिया गया है,जो ज्ञान और आध्यात्मिक धारणा का प्रतीक है। अखंड ज्योति या अमर ज्योति का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है ।अखंड ज्योति विशेष कर नवरात्रि में जगाई जाती है और इससे ज्ञान शक्ति और समृद्धि में वृद्धि होकर जितनी भी नकारात्मक शक्तियां है उनका शमन हो जाता है। मां भगवती दुर्गा की कृपा से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है,तथा पारिवारिक जीवन में सुख शांति और समृद्धि के सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। अखंड ज्योति के नीचे जौ,चावल या गेहूं रखना चाहिए, मिट्टी का दीपक या पीतल के दीपक में ज्योति को प्रज्ज्वलित करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। अखंड ज्योति से व्यक्तित्व का विकास एवं स्वास्थ्य प्रबंधन होता है, पारिवारिक श्रेष्ठता बनी रहती है सामाजिक विकास होता है और सामाजिक स्थिरता के साथ सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण होता है। सुंदर और कल्याणकारी आरोग्य और संपदा को देने वाले है दीप ज्योति हमारी बुद्धि में विकास के लिए कल्याणकारी हो। इसी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु हरि शेवा उदासीन आश्रम प्रांगण में महंत बाबू गिरी जी के प्रयासों से संपूर्ण नवरात्रि अवधि में 5100 अखंड दीपक प्रज्ज्वलन, माता वैष्णो का गुफा में दरबार, 1100 कन्याओं का पूजन इत्यादि कार्यक्रम भी किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त चैत्र नववर्ष प्रतिपदा पखवाड़ा के अन्तर्गत धाम प्रांगण में प्रतिदिन रात्रि 8 से 10 तक भजन संध्या एवं 1 अप्रैल को सुंदरकांड का पाठ का आयोजन हो रहा है।