ब्रह्मचारिणी मां की उपासना आत्म संयम और धैर्य की प्राप्ति का मार्ग
प्रयागराज।राजदेव द्विवेदी। माता ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा का दूसरा स्वरूप है, जो ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी मानी जाती हैं। उनका नाम ब्रह्मचारिणी ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। माता ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और शांत है, जो भक्तों को ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। वह अपने दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण करती हैं।
माता ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा
माता ब्रह्मचारिणी की कथा के अनुसार, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने कई वर्षों तक निराहार रहकर और कठिन तप करते हुए भगवान शिव की आराधना की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
माता ब्रह्मचारिणी की पूजा और महत्व
नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। उनकी पूजा करने से भक्तों को ज्ञान, बुद्धि और वैराग्य की प्राप्ति होती है। माता ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाना चाहिए और इसे ब्राह्मणों को दान करना चाहिए। इससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।माता ब्रह्मचारिणी की कृपा से भक्तों को आत्म-संयम और धैर्य की प्राप्ति होती है। उनकी पूजा से जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति और साहस मिलता है।
2008 से लगातार पत्रकारिता कर रहे हैं। 2008 से 2019 तक सर्वोदय वार्ता, सर्वोदय वार्ता मैगजीन में। 2020 से 2021 तक इंडियन लाइव टीवी में । 2021 से 2023 तक दैनिक समाचार पत्र पूर्वांचल स्वर प्रयागराज में। 2023 से 2024 तक दैनिक समाचार पत्र लक्ष्मण नगर जंक्शन में। 2024 से अब तक लगातार दैनिक समाचार पत्र लक्ष्य सामग्र में। 2021 से अब तक आवाज आपकी न्यूज़ पोर्टल में पत्रकार हैं।