अधिक मास परिक्रमा मार्ग में बने 8 सहायता केंद्र और 17 आश्रय स्थल; मोटरसाइकिल एंबुलेंस और महिला सुरक्षा दल तैनात।
डीग, 17 मई।अमरदीप सैन। अधिक मास के पावन अवसर पर राजस्थान सीमा क्षेत्र में 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक आयोजित होने वाली प्रसिद्ध बृज 84 कोस परिक्रमा को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम यात्रा के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं आधारभूत व्यवस्थाएं समय से पूर्ण कर ली गई हैं।
24 घंटे काम करेंगे नियंत्रण कक्ष (Control Rooms)
संपूर्ण परिक्रमा मार्ग पर चौबीसों घंटे निगरानी और त्वरित सहायता के लिए उपखंड स्तर पर हाईटेक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। किसी भी प्रकार की सूचना देने या आपातकालीन स्थिति में सहायता के लिए श्रद्धालु इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
-
डीग नियंत्रण कक्ष: 05641-294599
-
कामां नियंत्रण कक्ष: 7568351172 (प्रभारी: सुरजीत सिंह)
इन 8 प्रमुख स्थानों पर बने सहायता केंद्र
परिक्रमार्थियों की सुविधा के लिए मार्ग में 8 प्रमुख सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर विश्राम, पेयजल, सुलभ शौचालय, चिकित्सा, परामर्श और खोया-याया सूचना केंद्र की बेहतरीन व्यवस्था है:
-
कौथरा मोड़
-
टांकोली
-
आदिबद्री धाम
-
फायर स्टेशन डीग
-
केदारनाथ
-
भोजनथाली
-
ऐंचवाडा
-
नौनेरा
17 सरकारी स्कूलों को बनाया आश्रय स्थल
श्रद्धालुओं के सुरक्षित रात्रि विश्राम के लिए मार्ग में आने वाले 17 राजकीय विद्यालयों को आश्रय स्थल के रूप में विकसित किया गया है। इनमें शुद्ध पेयजल और शौचालयों की माकूल व्यवस्था है:
-
डीग उपखंड (8 आश्रय स्थल): पूंछरी, सांवई, बहज, डीग कस्बा (3 विद्यालय), टांकोली और पसोपा।
-
कामां उपखंड (9 आश्रय स्थल): बिलोंद, ऐंचवाडा, नौनेरा, सतवास आदि।
सुरक्षा और चिकित्सा के कड़े इंतजाम
आपात स्थिति से निपटने के लिए आपदा राहत कार्मिकों की विशेष नियुक्ति की गई है। तंग रास्तों में तुरंत इलाज पहुंचाने के लिए कार एंबुलेंस के साथ-साथ मोटरसाइकिल एंबुलेंस भी तैनात की गई हैं।
कानून व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पुलिस गश्ती दल लगातार गश्त करेंगे। विशेष रूप से महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला सुरक्षा दल और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। पूरे मार्ग पर स्वच्छता के लिए चलित शौचालय, कचरा गाड़ियां और पर्याप्त सफाई कर्मचारी तैनात किए गए हैं। स्थानीय भक्तों द्वारा जगह-जगह प्याऊ और भंडारे भी लगाए गए हैं।