शाहपुरा के रामनिवास धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच संपन्न, हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में अर्पित की आस्था।
शाहपुरा। रामस्नेही संप्रदाय की मुख्यपीठ रामनिवास धाम में बुधवार को गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। प्रातःकाल से ही धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों रामस्नेही अनुयायियों ने आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के पावन स्तंभजी पर माथा टेककर गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की और आध्यात्मिक आशीर्वाद प्राप्त किया।
पूरे रामनिवास धाम में रामनाम की मधुर ध्वनि, भक्ति-भजन और गुरु वंदना से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।
महाआरती और पूजन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यवाहक भंडारी संत नवनिधराम महाराज, ट्रस्टी रामगोपाल सोमाणी, सूर्यप्रकाश बिड़ला तथा कैलाशचंद्र तोषनीवाल की अगुवाई में स्तंभजी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। रामनाम अंकित कर स्तंभजी का पूजन करने के बाद भव्य महाआरती संपन्न हुई, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
धाम परिसर में स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं संभालीं, जिससे पूरे आयोजन में अनुशासन और सेवा भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
गुरु वही जो स्वयं श्रेष्ठ आचरण करे : संत नवनिधराम महाराज
इन दिनों रामनिवास धाम में चातुर्मास कर रहे कार्यवाहक भंडारी संत नवनिधराम महाराज ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु-शिष्य परंपरा पर विस्तृत प्रवचन दिया।
उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु साक्षात परमात्मा का स्वरूप हैं। गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाला दिव्य पथप्रदर्शक होता है। गुरु के बिना आत्मज्ञान, संस्कार और जीवन का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक भौतिकवादी युग में गुरु और शिष्य के संबंधों के मूल्यों का क्षरण चिंता का विषय है। ऐसे समय में सनातन संस्कृति की गुरु परंपरा को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।
शास्त्रों के माध्यम से समझाया गुरु का स्वरूप
संत नवनिधराम महाराज ने अपने प्रवचन में द्वयोपनिषद् का उल्लेख करते हुए कहा कि वास्तविक गुरु वही है जो वेदों का ज्ञाता, भगवान विष्णु का भक्त, ईर्ष्या-द्वेष से रहित, मंत्रों का ज्ञाता, उनमें पूर्ण निष्ठा रखने वाला तथा पवित्र आचरण वाला हो।
उन्होंने कहा कि गुरु केवल उपदेश देने वाला नहीं, बल्कि अपने जीवन से प्रेरणा देने वाला होता है। उसका आचरण ही समाज के लिए आदर्श बनता है और वही संस्कारों का दीप प्रज्ज्वलित करता है।
सच्चा शिष्य वही जो गुरु के आदर्शों पर चले
संत नवनिधराम महाराज ने शिष्य के कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल किसी गुरु का अनुयायी कहलाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक शिष्य वही है जो गुरु के उपदेशों को अपने जीवन में उतारकर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत करे।
उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध केवल शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का माध्यम है। गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।
दिनभर चले धार्मिक आयोजन
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान रामनिवास धाम में पूरे दिन गुरु वंदना, रामधुन, भजन-कीर्तन, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम निरंतर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने जीवन में सेवा, समर्पण तथा आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। रामनिवास धाम में उमड़ी अपार आस्था ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा को नई ऊर्जा और नई चेतना प्रदान की।
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Bhilwara, Rajasthan
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