शाहपुरा जिला बहाली की मांग तेज, ब्लैक डे पर 14वां स्मरण पत्र सौंप आंदोलन तेज करने का ऐलान


एक वर्ष सात माह से जारी आंदोलन के बीच अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया, संघर्ष समिति ने चुनाव में भी मुद्दा बनाने की चेतावनी दी।

शाहपुरा। शाहपुरा जिला बहाली की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को शाहपुरा जिला बहाल करो संघर्ष समिति के नेतृत्व में “ब्लैक डे” मनाते हुए सैकड़ों नागरिकों, अधिवक्ताओं एवं संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने उपखंड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री के नाम 14वां स्मरण पत्र उपखंड अधिकारी को सौंपते हुए शाहपुरा को पुनः जिले का दर्जा देने की मांग दोहराई गई।

संघर्ष समिति के महासचिव एडवोकेट कमलेश मुंडेतिया ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ का नहीं, बल्कि क्षेत्र के सम्मान, विकास और जनभावनाओं की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि सरकार को कई बार ज्ञापन और आग्रह सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे आमजन में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

हर माह की 28 तारीख बन चुकी है ‘ब्लैक डे’ का प्रतीक

जिला दर्जा समाप्त होने के बाद से शाहपुरा की जनता प्रत्येक माह की 28 तारीख को “ब्लैक डे” के रूप में मना रही है। इसी क्रम में सोमवार को भी बड़ी संख्या में लोग काली पट्टियां बांधकर उपखंड कार्यालय पहुंचे और “शाहपुरा जिला बहाल करो”, “वादा निभाओ-जिला लौटाओ” तथा “जनभावनाओं का सम्मान करो” जैसे नारों के साथ प्रदर्शन किया।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा एवं संयोजक रामप्रसाद जाट के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम स्मरण पत्र सौंपते हुए पूर्व में दिए गए आश्वासन को शीघ्र पूरा करने की मांग की गई।

अधिवक्ताओं ने किया न्यायिक कार्य का बहिष्कार

आंदोलन को अभिभाषक संस्था शाहपुरा का भी समर्थन मिला। संस्था अध्यक्ष आशीष पालीवाल ने न्यायालय में कार्य स्थगन पत्र प्रस्तुत कर जिले की बहाली की मांग का समर्थन किया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने सभी न्यायालयों में न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया।

अधिवक्ताओं का कहना था कि जिला दर्जा समाप्त होने से आम नागरिकों को प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यों के लिए अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

14 माह पुराने आश्वासन पर उठाए सवाल

संघर्ष समिति ने बताया कि लगभग 14 माह पूर्व जयपुर में मुख्यमंत्री एवं शाहपुरा विधायक की मौजूदगी में शाहपुरा को पुनः जिला बनाने का सकारात्मक आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ।

सहसंयोजक सूर्यप्रकाश ओझा ने कहा कि जब तक शाहपुरा को दोबारा जिले का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि आगामी नगर निकाय एवं पंचायती राज चुनावों से पहले आंदोलन को गांव-गांव और वार्ड-वार्ड तक पहुंचाया जाएगा।

समीक्षा बैठक में बनी नई रणनीति

ब्लैक डे कार्यक्रम के बाद संघर्ष समिति की समीक्षा बैठक अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में आंदोलन के अगले चरण की रणनीति पर चर्चा करते हुए निर्णय लिया गया कि आवश्यकता पड़ने पर संघर्ष समिति आगामी नगर निकाय चुनाव में स्वयं चुनाव लड़ने अथवा जिले की बहाली का समर्थन करने वाले प्रत्याशियों के पक्ष में खुलकर प्रचार करने पर भी विचार करेगी।

सरकार पर प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का आरोप

संघर्ष समिति के संयोजक रामप्रसाद जाट ने आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए सरकार और उसके प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि संघर्ष समिति के महासचिव कमलेश मुंडेतिया की बहन का पंचायत समिति शाहपुरा से सहाड़ा स्थानांतरण केवल संघर्ष समिति से जुड़े होने के कारण किया गया है। समिति ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए निष्पक्ष व्यवहार की मांग की।

सरकार से संवाद के लिए बनी पांच सदस्यीय समिति

बैठक में सरकार से वार्ता एवं आंदोलन को संगठित दिशा देने के लिए रामप्रसाद जाट, सूर्यप्रकाश ओझा, उदयलाल बेरवा, माधुलाल रेगर और सत्यनारायण पाठक की पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया।

कार्यक्रम में अभिभाषक संस्था अध्यक्ष आशीष पालीवाल, उपाध्यक्ष अंकित शर्मा, राजेन्द्र पाण्डे, उदयलाल बेरवा, सुरेश घूसर, प्रवीण पारीक, हाजी उस्मान मोहम्मद छिपा, थानमल जीनगर, अजय मेहता, त्रिलोकचंद नौलखा, अमन ओझा, राजेश वर्मा, निखिल व्यास, गजेन्द्रप्रताप सिंह राणावत सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, संघर्ष समिति के सदस्य एवं नागरिक मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें:


Aawaz Aapki News WhatsApp चैनल से जुड़ें:

सबसे तेज़ और ताज़ा खबरें सीधे अपने व्हाट्सएप पर पाएं।

WhatsApp अभी जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *