डॉ. शंकर लाल माली ने युवाओं से सवाल करने, तथ्यों का विश्लेषण करने और संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान खोजने का आह्वान किया।
शाहपुरा। देश का भविष्य केवल किताबों में नहीं, बल्कि युवाओं की सोच, सवालों और संकल्पों में लिखा जाता है। इसी विचार को केंद्र में रखते हुए सोमवार को शाहपुरा के बारहठ महाविद्यालय में युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में युवाओं ने देश, शिक्षा, संस्कृति, तकनीक और वर्तमान सामाजिक चुनौतियों से जुड़े सवाल उठाए। वक्ताओं ने युवाओं से तर्कशील सोच विकसित करने और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान तलाशने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, चित्तौड़ प्रांत के प्रांत कार्यवाह डॉ. शंकर लाल माली रहे। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. पुष्करराज मीणा, प्राचार्य एवं जिला अध्यक्ष, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, भीलवाड़ा उपस्थित रहे। कार्यक्रम शाहपुरा नगर संघचालक कन्हैया लाल की उपस्थिति में आयोजित हुआ।
मां शारदे और भारत माता के पूजन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे एवं भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन हुआ और युवाओं के साथ संवाद का सिलसिला शुरू हुआ।
‘भारत की सोच सहअस्तित्व की रही है’
युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. शंकर लाल माली ने कहा कि भारत ने प्रारंभ से ही सहअस्तित्व के विचार को स्वीकार किया है। जिस प्रकार प्रकृति में जड़ और चेतन एक-दूसरे के साथ सहअस्तित्व में रहते हैं, उसी प्रकार भारतीय समाज में विभिन्न पीढ़ियां संवाद और परस्पर सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ती रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन केवल साम्राज्य विस्तार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण की भावना उसके मूल में रही है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और ‘अतिथि देवो भवः’ जैसे संस्कार भारतीय जीवन पद्धति की व्यापकता को दर्शाते हैं।
भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान पर चर्चा
डॉ. माली ने भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति के सम्मान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में नारी शक्ति को विशेष स्थान दिया गया है। राधा-कृष्ण, गौरी-शंकर और सीता-राम जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने महिला सम्मान की भारतीय परंपरा पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं केवल धार्मिक आस्थाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक मूल्यों और जीवन जीने की दिशा भी प्रदान करती हैं। वेद, पुराण और गीता जैसे ग्रंथों से जीवन के विभिन्न पक्षों को समझने और सही मार्ग चुनने की प्रेरणा मिलती है।
तक्षशिला और नालंदा से आधुनिक तकनीक तक भारत की यात्रा
युवा संवाद में भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था का भी उल्लेख हुआ। डॉ. माली ने कहा कि भारत प्राचीनकाल से ही ज्ञान और शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। तक्षशिला, नालंदा और ओदंतपुरी जैसे शिक्षा केंद्रों में देश-विदेश से विद्यार्थी और विद्वान अध्ययन के लिए आते थे।
उन्होंने कहा कि आज भारत के सामने अपनी गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के साथ जोड़ने की चुनौती है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में विज्ञान और तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है और इस क्षेत्र में युवाओं को निर्णायक भूमिका निभानी होगी।
सोशल मीडिया पर तथ्यों की जांच करने की सलाह
डॉ. माली ने युवाओं को सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी सचेत किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कई बार भ्रमित करने वाली और भ्रामक जानकारी सामने आती है। ऐसे में युवाओं को किसी भी जानकारी को आंख मूंदकर स्वीकार करने के बजाय तथ्यों की जांच और तर्कशील सोच को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं से कहा कि किसी भी विषय पर निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले तथ्यों को समझें, सवाल करें और उसके विभिन्न पक्षों का विश्लेषण करें। उन्होंने इसे जागरूक नागरिक और जिम्मेदार युवा की पहचान बताया।
2047 का विकसित भारत युवाओं के कंधों पर
डॉ. माली ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने युवाओं से विज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे आने तथा अपनी प्रतिभा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि देश के सामने मौजूद समस्याओं का समाधान संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से तलाशना चाहिए। अपनी बात मजबूती से रखने के साथ-साथ रचनात्मक संवाद की राह अपनाने पर उन्होंने जोर दिया।
संघ के शताब्दी वर्ष में युवा संवाद अहम पहल
मुख्य वक्ता ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में युवा संवाद को युवाओं से सीधे संवाद स्थापित करने और उनकी जिज्ञासाओं, विचारों एवं समस्याओं को समझने की महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
युवाओं ने बेबाकी से पूछे सवाल
कार्यक्रम की खासियत रही कि विद्यार्थियों ने केवल वक्ताओं को सुनने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी जिज्ञासाओं और समस्याओं को खुलकर सामने रखा।
विद्यार्थियों ने पारंपरिक ज्ञान को पाठ्यसामग्री में शामिल करने, स्कूल-कॉलेजों में नियमित काउंसलिंग, परीक्षा व्यवस्था और प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं से जुड़े सवाल उठाए। विद्यार्थियों ने यह भी पूछा कि परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को रोकने के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को व्यापक स्तर पर क्यों नहीं अपनाया जाता।
इन सवालों के कारण कार्यक्रम एकतरफा भाषण के बजाय वास्तविक अर्थों में युवा संवाद का रूप ले सका। विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें अपनी समस्याएं और विचार लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखने के लिए प्रेरित किया गया।
200 से अधिक युवाओं ने लिया भाग
मुख्य अतिथि डॉ. पुष्करराज मीणा ने युवा संवाद कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए युवाओं की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता तथा 200 से अधिक युवाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को देश, समाज और शिक्षा से जुड़े विषयों पर विचार करने, सवाल पूछने तथा सकारात्मक एवं रचनात्मक संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने के लिए प्रेरित करना रहा।
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Bhilwara, Rajasthan
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